भारतीय राजनीति और कानूनी जगत के प्रमुख स्तंभ Swaraj Kaushal का आज 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सीने में दर्द की शिकायत पर उन्हें AIIMS दिल्ली ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पूर्व विदेश मंत्री स्व.सुषमा स्वराज के पति और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता Swaraj Kaushal का यह निधन पूरे देश में शोक की लहर ला दिया है।
दिल्ली भाजपा ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनका अंतिम संस्कार आज शाम 4:30 बजे लोधी रोड श्मशान घाट पर किया जाएगा। स्वराज कौशल का निधन न केवल उनके परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि कानूनी और राजनीतिक क्षेत्र में भी एक बड़ा झटका है। उनकी पत्नी सुषमा स्वराज का निधन 2019 में हृदयाघात से हो चुका था, और अब बेटी बांसुरी स्वराज ही परिवार की इकलौती वारिस हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
Swaraj Kaushal का जन्म 12 जुलाई 1952 को हिमाचल प्रदेश के सोलन में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता मदन लाल और माता लाज्यावती थीं। उन्होंने चंडीगढ़ के डीएवी स्कूल से बीए की डिग्री प्राप्त की और पंजाब विश्वविद्यालय के विधि संकाय से एलएलबी पूरा किया। बचपन से ही पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्वराज ने कानूनी क्षेत्र में कदम रखते ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।उनकी शिक्षा ने उन्हें न केवल एक कुशल वकील बनाया, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर गहरी समझ प्रदान की।
स्वराज कौशल ने हमेशा सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए अपने करियर की शुरुआत की, जो बाद में उनके जीवन का आधार बनी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा ने उन्हें देश के जटिल कानूनी और सामाजिक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता दी।
कानूनी करियर की ऊंचाइयां
Swaraj Kaushal एक प्रमुख आपराधिक वकील के रूप में नई दिल्ली में प्रैक्टिस करते थे। मात्र 34 वर्ष की आयु में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया गया, जो देश में सबसे कम उम्र का ऐसा सम्मान था। 1987 में वे मिजोरम के पहले महाधिवक्ता बने, जो उस समय देश के सबसे युवा महाधिवक्ता थे।इमरजेंसी काल (1975-77) में उन्होंने समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का बड़ौदा डायनामाइट केस में बचाव किया।







