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₹14,000 करोड़ का ‘राज़’! क्या बिहार चुनाव जीतने के लिए World Bank का पैसा महिलाओं को बाँटा गया?

प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने आरोप लगाया है कि ₹14,000 करोड़ World Bank फंड को चुनाव से ठीक पहले महिलाओं को बाँटा गया। जन सुराज ने इस पर गहन जांच की मांग की है।
Khabar Aangan Published on: 18 नवम्बर 2025
₹14,000 करोड़ का ‘राज़’! क्या बिहार चुनाव जीतने के लिए World Bank का पैसा महिलाओं को बाँटा गया?

प्रशांत किशोर की पार्टी ने लगाया देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप, चुनाव से ठीक पहले World Bank Funds के दुरुपयोग की मांग

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली प्रचंड जीत के बाद भी सत्तारूढ़ गठबंधन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने एक ऐसा विस्फोटक और गंभीर आरोप लगाया है जिसने पूरे देश की राजनीति और वित्त जगत को हिलाकर रख दिया है। पार्टी का दावा है कि World Bank से विकास परियोजनाओं के लिए मिले ₹14,000 करोड़ की राशि को जानबूझकर डाइवर्ट (Diverted) किया गया।

जन सुराज के प्रवक्ता पवन वर्मा ने आरोप लगाया है कि यह राशि चुनाव से ठीक पहले, महिलाओं को ₹10,000 नकद हस्तांतरण (Cash Transfer) के रूप में दी गई, जिसका सीधा उद्देश्य चुनाव परिणामों को प्रभावित करना था। जन सुराज ने इस कदम को “सार्वजनिक धन का स्पष्ट दुरुपयोग” और “चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का अनैतिक प्रयास” बताया है, और इसकी गहन जांच की मांग की है। यह आरोप World Bank द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं के दुरुपयोग के मामले में देश का सबसे बड़ा आरोप है।

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1. ₹14,000 करोड़ का गंभीर आरोप: क्या हुआ World Bank Funds का?

जन सुराज के आरोपों के केंद्र में ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत ₹10,000 का नकद हस्तांतरण है, जो 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में डाला गया।

  • आरोप का समय और राशि: जन सुराज का दावा है कि यह ₹14,000 करोड़ की राशि आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होने से महज एक घंटा पहले निकाल कर वितरित की गई। यह जल्दबाज़ी और समय को लेकर किया गया दावा इस आरोप को और भी गंभीर बना देता है।
  • ऋण का स्रोत: पार्टी ने कहा है कि यह ₹10,000 की राशि कुल ₹21,000 करोड़ के एक World Bank फंड से ली गई थी, जो किसी अन्य विकास परियोजना के लिए आवंटित किया गया था।
  • राज्य की वित्तीय स्थिति: जन सुराज ने इस कदम की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिहार का सार्वजनिक ऋण (Public Debt) इस समय ₹4,06,000 करोड़ तक पहुँच चुका है और राज्य पर प्रतिदिन ₹63 करोड़ का ब्याज है। ऐसे में, अचानक इतनी बड़ी राशि का वितरण करना World Bank फंड के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

2. चुनाव को प्रभावित करने का ‘अनएथिकल’ प्रयास

जन सुराज ने स्पष्ट किया है कि भले ही सरकार कानूनी रूप से फंड को डायवर्ट करने का तर्क बाद में दे दे, लेकिन World Bank के पैसे का चुनाव से ठीक पहले इस तरह उपयोग करना घोर अनैतिक है।

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  • चुनावी लाभ: ₹10,000 की नकद राशि सीधे 1.25 करोड़ महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए काफी थी। जन सुराज का आरोप है कि मतदाताओं के बीच यह अफवाह फैलाई गई कि यदि सत्तारूढ़ गठबंधन सत्ता में वापस नहीं आता है, तो बाकी पैसा या योजना का लाभ उन्हें नहीं मिलेगा। इस धारणा ने चुनाव परिणामों को बुरी तरह प्रभावित किया।
  • नीतिगत विरोधाभास: प्रधानमंत्री मोदी ने पहले मुफ्त की योजनाओं (Freebies) की आलोचना की थी, लेकिन World Bank के विकास फंड को इस तरह से चुनावी लाभ के लिए उपयोग करना, राजनीतिक नैतिकता के मानकों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

3. World Bank की फंडिंग और उसके नियम

World Bank द्वारा वित्त पोषित परियोजनाएँ आमतौर पर बहुत कड़े नियमों और शर्तों के तहत दी जाती हैं। ये फंड अक्सर शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास या इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विशिष्ट क्षेत्रों के लिए ‘earmarked’ होते हैं।

  • फंडिंग का उद्देश्य: World Bank का पैसा किसी राज्य की विकास दर को बढ़ाने, गरीबी कम करने और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के लिए होता है, न कि चुनावी सीजन में मतदाताओं को नकद लाभ देने के लिए।
  • नियमों का उल्लंघन: यदि यह आरोप सच साबित होता है कि World Bank के फंड को सीधे नकद हस्तांतरण के लिए उपयोग किया गया, तो यह अंतर्राष्ट्रीय नियमों और World Bank के दिशानिर्देशों का गंभीर उल्लंघन होगा। इससे भविष्य में Bihar को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहायता प्राप्त करने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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4. सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया: जांच की मांग

जन सुराज द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों के बाद, सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों तरफ से प्रतिक्रिया आई है।

  • सत्तारूढ़ पक्ष का खंडन: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि ये दावे निराधार हैं और विपक्ष को यदि कोई सबूत है तो वह सार्वजनिक करे।
  • विपक्ष की मांग: जन सुराज ने इन आरोपों की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए एक संपूर्ण और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इस वित्तीय हेराफेरी का सच सामने आना चाहिए, क्योंकि यह आम जनता के विकास के पैसे का दुरुपयोग है।

5. निष्कर्ष: World Bank फंड का दुरुपयोग, लोकतंत्र को खतरा

जन सुराज का यह आरोप, चाहे वह साबित हो या न हो, बिहार की वित्तीय और राजनीतिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। World Bank के फंड का दुरुपयोग करना, और वह भी चुनावी लाभ के लिए, केवल एक वित्तीय अपराध नहीं है, बल्कि यह उस लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव को कमजोर करता है जो विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों पर निर्भर है। इस मामले में World Bank और केंद्र सरकार को आगे आकर पूरे फंड के उपयोग का स्पष्टीकरण देना होगा।

Disclaimer : यह समाचार रिपोर्ट World Bank फंड के कथित दुरुपयोग पर जन सुराज पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। यह इन दावों की सत्यता को सत्यापित नहीं करता है। World Bank के फंड की हेराफेरी पर अंतिम निष्कर्ष किसी सरकारी या न्यायिक जांच के बाद ही दिया जा सकता है।

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