घनश्यामपुर थाना अंतर्गत कोर्थु गांव में दबंगों द्वारा जबरन जमीन पर कब्जा जमाने, दर्जनों पेड़ काटने और विरोध करने पर गंभीर धाराओं में फंसाने की धमकी देने की वारदात हुई है। इस घटना के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
‘खबर आंगन’ की क्राइम डेस्क को मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित पक्ष के राम बिनोद ठाकुर और अनिल ठाकुर ने घनश्यामपुर थाने में एक विस्तृत लिखित आवेदन सौंपा है। इस आवेदन के जरिए उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपनी पुश्तैनी जमीन और जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है।
पुलिस को दिए गए शिकायती आवेदन में जमीन के मालिकाना हक को लेकर कई अहम ऐतिहासिक तथ्य पेश किए गए हैं। पीड़ितों ने बताया कि मौजा कोर्थु के अंतर्गत खाता संख्या 828 (पुराना) और खेसरा संख्या 3330 पर उनका पुश्तैनी अधिकार है।
नए सर्वे के अनुसार, इस जमीन का खेसरा संख्या 6713 और 6714 हो गया है, जिसका कुल रकबा करीब 38 डिसमिल है। यह पूरी संपत्ति उनके पिता कमल किशोर ठाकुर और स्वर्गीय जयगोविंद ठाकुर के नाम पर सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है।
आवेदकों का स्पष्ट दावा है कि यह जमीन उनके पूर्वजों ने आज से 119 साल पहले, यानी वर्ष 1907 में खरीदी थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिहार सरकार के वर्तमान भूमि सर्वे में भी यह पूरी संपत्ति उन्हीं के परिवार के नाम से विधिवत दर्ज पाई गई है।
दबंगों का कहर: पेड़ काटे और दी फर्जी केस की धमकी
कागजातों में नाम होने के बावजूद, गांव के ही कुछ लोग इस बेशकीमती जमीन पर बुरी नजर गड़ाए बैठे हैं। आवेदन में अर्जुन सदा, बिंदेश्वर सदा और सुरेंद्र सदा सहित कुछ अन्य अज्ञात लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
पीड़ितों का आरोप है कि ये आरोपी अक्सर उनकी जमीन पर जबरन अपना अधिकार जताने की कोशिश करते हैं। इससे पहले भी ये लोग विवादित स्थल पर आकर पेड़-पौधों और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा चुके हैं।
हालिया घटनाक्रम में मनबढ़ आरोपियों ने हद पार करते हुए उनकी जमीन पर लगे आधा दर्जन से अधिक हरे-भरे पेड़ों को कुल्हाड़ी से काटकर गिरा दिया। इस अवैध कटाई की सूचना राम बिनोद ठाकुर और अनिल ठाकुर को गांव के ही कुछ स्थानीय लोगों ने फोन कॉल के माध्यम से दी।
SC-ST एक्ट का डर दिखाकर जमीन हड़पने की साजिश
सूचना मिलते ही जब पीड़ित परिवार के सदस्य आनन-फानन में मौके पर पहुंचे और अपनी संपत्ति को बर्बाद होते देख विरोध दर्ज कराया, तो आरोपियों का रवैया बेहद आक्रामक हो गया।
आरोपियों ने सरेआम पीड़ितों के साथ भद्दी गालियां देते हुए दुर्व्यवहार किया। बात यहीं नहीं रुकी; दबंगों ने ठाकुर परिवार को खुलेआम धमकी दी कि यदि वे इस जमीन से पीछे नहीं हटे, तो उन्हें ‘एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट’ के तहत फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर जेल भिजवा दिया जाएगा।
ग्रामीण इलाकों में जमीन विवाद के मामलों में अक्सर एससी-एसटी एक्ट का इस्तेमाल एक दबाव की रणनीति (Pressure Tactic) के रूप में किया जाता है। इस खौफनाक धमकी के बाद पीड़ित परिवार पूरी तरह से सहमा हुआ है और पुलिस से न्याय की उम्मीद कर रहा है।
कैथी लिपि के दस्तावेजों में उलझी पुलिस की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए घनश्यामपुर पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई है। घनश्यामपुर के थानाध्यक्ष (SHO) आलोक कुमार ने ‘खबर आंगन’ को बताया कि पीड़ित परिवार की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त हो चुकी है और पुलिस ने त्वरित गति से मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
तनाव को कम करने के लिए थानाध्यक्ष ने दोनों पक्षों को नोटिस भेजकर थाने पर तलब किया। पुलिस के सामने जब दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे पेश किए, तो एक नई तकनीकी समस्या खड़ी हो गई। विवादित जमीन के पुराने और मूल दस्तावेज ‘कैथी लिपि’ (Kaithi Script) में लिखे पाए गए हैं।
कैथी लिपि बिहार की एक ऐतिहासिक और पुरानी प्रशासनिक लिपि है, जिसे पढ़ना आम लोगों और आधुनिक अधिकारियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है।
शनिवार को होगा हिंदी अनुवाद, पुलिस ने लगाई रोक
दस्तावेजों की जटिलता को देखते हुए थानाध्यक्ष आलोक कुमार ने फिलहाल विवादित स्थल पर किसी भी तरह के निर्माण, पेड़ काटने या लकड़ी हटाने पर पूरी तरह से रोक (Status Quo) लगा दी है।
पुलिस ने दोनों पक्षों को सख्त निर्देश दिया है कि वे शनिवार को अपने-अपने कैथी लिपि वाले दस्तावेजों का प्रमाणित ‘हिंदी अनुवाद’ करवाकर थाने में प्रस्तुत करें।
SHO ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जो भी पक्ष कानून को हाथ में लेने या पुलिस के आदेशों का उल्लंघन करने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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हमारा निष्कर्ष
Darbhanga जिले के कोर्थु गांव का यह मामला बिहार के उस जटिल भूमि विवाद का सटीक उदाहरण है, जहां पीढ़ियों पुराने कागज और आधुनिक दबंगई आमने-सामने हैं। पुलिस द्वारा तुरंत हस्तक्षेप करना और दस्तावेजों का हिंदी अनुवाद मांगना एक बेहद पेशेवर और सही कदम है।
‘खबर आंगन’ की डेस्क का यह मानना है कि अक्सर भूमि माफिया या दबंग लोग SC-ST एक्ट जैसी गंभीर धाराओं का दुरुपयोग करके असली भू-स्वामियों को डराने का प्रयास करते हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कैथी लिपि के दस्तावेजों की जांच किसी निष्पक्ष और विशेषज्ञ अनुवादक से कराई जाए।
यदि 1907 के खरीद दस्तावेज और वर्तमान सर्वे खतियान राम बिनोद ठाकुर के पक्ष में हैं, तो पुलिस को आरोपियों के खिलाफ पेड़ काटने (वन संपत्ति नुकसान) और फर्जी मुकदमे की धमकी देने के आरोप में तुरंत एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि गांव में शांति व्यवस्था कायम रहे।
Disclaimer: यह खबर ‘Khabar Aangan’ की क्राइम डेस्क द्वारा घनश्यामपुर थाना (Darbhanga) में दिए गए लिखित आवेदन, पीड़ितों के बयानों और थानाध्यक्ष आलोक कुमार की आधिकारिक जानकारी के आधार पर संकलित की गई है। जमीन का वास्तविक मालिकाना हक और विवादित दस्तावेजों की प्रामाणिकता पुलिस जांच और राजस्व विभाग/न्यायालय के अंतिम फैसले पर निर्भर करती है।