राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने घटती जन्म दर को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने विधानसभा में देश की पहली ‘पॉपुलेशन मैनेजमेंट पॉलिसी’ (जनसंख्या प्रबंधन नीति) का ड्राफ्ट पेश किया है।
इस नई नीति के तहत राज्य सरकार लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए भारी वित्तीय प्रोत्साहन देने जा रही है। अगर कोई दंपत्ति दूसरे या तीसरे बच्चे को जन्म देता है, तो सरकार उन्हें डिलीवरी के समय नकद 25,000 रुपये का इनाम देगी।
‘खबर आंगन’ की न्यूज़ डेस्क इस ऐतिहासिक और देश की सबसे अनोखी जनसंख्या नीति की विस्तृत इनसाइड रिपोर्ट आपके लिए लेकर आई है। हम जानेंगे कि आखिर क्यों भारत के एक राज्य को अपनी ही जनसंख्या बढ़ाने की जरूरत पड़ गई।
मुख्यमंत्री नायडू ने विधानसभा में साफ किया कि अब वक्त ‘जनसंख्या नियंत्रण’ (Population Control) का नहीं, बल्कि ‘जनसंख्या प्रबंधन’ (Population Management) का है। सरकार का लक्ष्य लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करना है।
इस नई पॉलिसी के तहत सरकार ने कई बड़े और लुभावने वित्तीय वादे किए हैं। इसका सबसे बड़ा आकर्षण दूसरे और तीसरे बच्चे के जन्म पर मिलने वाली 25,000 रुपये की नकद सहायता है।
इसके अलावा, अगर कोई दंपत्ति तीसरे बच्चे को जन्म देता है, तो उसे सरकार की ओर से हर महीने 1,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी मिलेगी। ‘पोषण-शिक्षा-सुरक्षा’ पैकेज के तहत यह राशि बच्चे के पहले पांच साल तक लगातार दी जाएगी।
वर्किंग पैरेंट्स को मिलेगी बंपर छुट्टियां
इस नई नीति में कामकाजी माता-पिता (Working Parents) का भी खास ख्याल रखा गया है। तीसरे बच्चे के जन्म पर मां को अब पूरे 12 महीने (एक साल) की मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) दी जाएगी।
वहीं, पिता को भी इस पॉलिसी के तहत दो महीने की पैटरनिटी लीव (Paternity Leave) देने का प्रावधान किया गया है। इसका मकसद बच्चों की परवरिश में माता-पिता दोनों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना है।
शिक्षा और स्वास्थ्य में भी मिलेगी भारी छूट
सरकार केवल नकद प्रोत्साहन तक ही सीमित नहीं है। तीसरे बच्चे की उम्र 18 साल होने तक सरकारी और आवासीय स्कूलों में उसकी पूरी शिक्षा एकदम मुफ्त होगी।
साथ ही, जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में चिकित्सा संबंधी समस्या आ रही है, उन्हें सरकारी अस्पतालों में भारी सब्सिडी पर आईवीएफ (IVF) की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
राज्य सरकार का लक्ष्य महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व के साथ-साथ उनके करियर को भी बढ़ावा देना है। इसके लिए हर 50 बच्चों पर एक विशेष ‘चाइल्ड केयर सेंटर’ और वर्किंग वीमेन हॉस्टल (Working Women Hostel) का निर्माण किया जाएगा।
महिलाओं के लिए पांच-स्तरीय ‘लाइफ-साइकिल’ विजन
सरकार ने इस नीति के तहत महिलाओं को पूरी तरह से केंद्र में रखा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह नीति गर्भावस्था से लेकर बुढ़ापे तक महिलाओं का समर्थन करेगी।
इसके लिए एक ‘फाइव-टियर लाइफ-साइकिल’ (Five-tier Lifecycle) अप्रोच तैयार की गई है। यह पांच प्रमुख स्तंभों पर टिकी है— मातृत्व, शक्ति (सशक्तिकरण), नैपुण्यम (कौशल विकास), क्षेमा (कल्याण) और संजीवनी (कायाकल्प)।
राज्य सरकार ‘सिल्वर स्किल रजिस्ट्री’ (Silver Skill Registry) के जरिए अपनी बुजुर्ग आबादी को भी अर्थव्यवस्था से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके तहत उम्रदराज़ लोग भी अपने अनुभव के आधार पर काम कर सकेंगे।
आखिर क्यों Andhra Pradesh को बढ़ानी पड़ रही है अपनी आबादी?
सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश का एक राज्य लोगों से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील क्यों कर रहा है। इसके पीछे एक बहुत गहरा आर्थिक और जनसांख्यिकीय संकट छिपा है।
मुख्यमंत्री नायडू ने आधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 1993 में राज्य की कुल प्रजनन दर (TFR) 3.0 थी, जो अब गिरकर मात्र 1.5 रह गई है। किसी भी राज्य की जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए यह दर कम से कम 2.1 होनी चाहिए।
वर्तमान में राज्य के लगभग 58% परिवारों में केवल एक ही बच्चा है। अगर यही स्थिति रही, तो राज्य में काम करने वाले युवाओं की भारी कमी हो जाएगी, जिसका सीधा और विनाशकारी असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
जापान और इटली जैसी हो जाएगी हालत
नायडू ने विधानसभा में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अभी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में Andhra Pradesh की हालत भी जापान, इटली और दक्षिण कोरिया जैसी हो जाएगी।
इन देशों में जन्म दर इतनी कम हो गई है कि वहां बुजुर्गों की आबादी बहुत ज्यादा है और युवाओं का भारी अकाल पड़ गया है। राज्य सरकार को डर है कि 2047 तक राज्य की 23 प्रतिशत से ज्यादा आबादी बुजुर्ग हो जाएगी।
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इससे न केवल राज्य का आर्थिक विकास ठप पड़ जाएगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं और पेंशन पर भी सरकारी खजाने का भारी बोझ बढ़ जाएगा। इसलिए युवाओं की आबादी बढ़ाना अब राज्य की सबसे बड़ी मजबूरी बन गया है।
लोकसभा सीटों के नुकसान का भी सता रहा है डर
दक्षिण भारत के राज्यों में जनसंख्या वृद्धि को लेकर एक और बहुत बड़ा राजनीतिक डर भी छिपा हुआ है। दरअसल, आने वाले कुछ सालों में देश में नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन (Delimitation) होने वाला है।
परिसीमन में लोकसभा और विधानसभा सीटों का बंटवारा जनसंख्या के आधार पर ही होता है। उत्तर भारत के राज्यों (जैसे यूपी और बिहार) में जन्म दर अब भी काफी अधिक है।
दक्षिण के राज्यों को यह डर सता रहा है कि उन्होंने परिवार नियोजन का कड़ाई से पालन किया, जिसके कारण उनकी आबादी कम हो गई। अब परिसीमन में कहीं इसका खामियाजा उन्हें अपनी लोकसभा सीटें गंवाकर न भुगतना पड़े।
Disclaimer: यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ‘खबर आंगन’ की न्यूज़ डेस्क द्वारा राज्य विधानसभा में पेश किए गए आधिकारिक ‘पॉपुलेशन मैनेजमेंट पॉलिसी’ ड्राफ्ट और मुख्यमंत्री के सार्वजनिक बयानों के आधार पर तैयार की गई है। हम सटीक और तथ्यपूर्ण पत्रकारिता के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।