सुरभि का निधन उनके पैतृक आवास पर एक जानलेवा हृदयाघात (हार्ट अटैक) के कारण हुआ। इस मनहूस खबर के सामने आते ही पूरे जिले और मध्य प्रदेश भाजपा संगठन में भारी शोक की लहर दौड़ गई है।
किसी भी माता-पिता के लिए अपनी युवा संतान को यूं अचानक खो देना सबसे बड़ा और असहनीय दुख होता है। खंडेलवाल परिवार पर इस वक्त जो दुखों का पहाड़ टूटा है, उसे शब्दों में बयां कर पाना बेहद मुश्किल है।
पारिवारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार की सुबह तक सब कुछ बिल्कुल सामान्य था। सुरभि अपने घर पर ही थीं और उनकी नियमित दिनचर्या चल रही थी।
सुबह करीब 11:30 बजे उनका रूटीन फिजियोथैरेपी (Physiotherapy) का सेशन हुआ था। इस सेशन के खत्म होने के कुछ ही देर बाद, दोपहर लगभग 12 बजे के आसपास अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
इससे पहले कि परिवार के सदस्य कुछ समझ पाते या उन्हें किसी बड़े अस्पताल में शिफ्ट किया जाता, सुरभि को एक तेज हार्ट अटैक आया। इस आकस्मिक हृदयाघात ने चंद मिनटों में ही उनकी सांसें हमेशा के लिए रोक दीं।
स्पेशल चाइल्ड थीं सुरभि, घर पर ही चल रहा था इलाज
सुरभि खंडेलवाल जन्म से ही एक ‘स्पेशल चाइल्ड’ (Special Child) थीं। परिवार के सदस्य उन्हें बहुत प्यार करते थे और उनकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का बेहद बारीकी से ख्याल रखा जाता था।
बताया जा रहा है कि पिछले काफी लंबे समय से वह शारीरिक रूप से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, घर पर ही उनकी उचित देखभाल और नियमित मेडिकल ट्रीटमेंट की पूरी व्यवस्था की गई थी।
माता-पिता और पूरा परिवार उनकी सेहत में सुधार की लगातार उम्मीद कर रहा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, और बुधवार की दोपहर इस हंसते-खेलते परिवार के लिए एक काला दिन बनकर आई।
खबर सुनते ही भोपाल से भागे दौड़े आए पिता हेमंत खंडेलवाल
जिस वक्त Betul में यह दुखद घटना घटी, उस समय भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अपने राजनीतिक कार्यों और संगठनात्मक बैठकों के सिलसिले में प्रदेश की राजधानी भोपाल में मौजूद थे।
जैसे ही उन्हें फोन पर अपनी लाडली बेटी के अचानक निधन की यह खौफनाक खबर मिली, वे पूरी तरह से टूट गए। वे अपने सारे आधिकारिक कार्यक्रम तुरंत रद्द करके भारी मन से वापस अपने घर की ओर रवाना हो गए।
विधायक के घर पर यह खबर आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते उनके आवास के बाहर स्थानीय नागरिकों, भाजपा कार्यकर्ताओं और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं की भारी भीड़ शोक संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए उमड़ पड़ी।
राजनीतिक गलियारों से आ रही हैं शोक संवेदनाएं
हेमंत खंडेलवाल मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बहुत बड़ा और सम्मानित नाम हैं। उनके इस दुखद समय में पक्ष और विपक्ष, दोनों ही खेमों के नेता अपनी राजनीतिक दूरियां भुलाकर उनके साथ मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों ने भी सोशल मीडिया और फोन के माध्यम से इस घटना पर अपना गहरा दुख प्रकट किया है। पूरी पार्टी (BJP) इस समय अपने प्रदेश अध्यक्ष के पारिवारिक शोक में शामिल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हेमंत खंडेलवाल अपनी बेटी सुरभि के बेहद करीब थे। अपनी व्यस्त राजनीतिक दिनचर्या के बावजूद, वह अपनी बेटी की देखभाल और उसकी खुशियों के लिए हमेशा समय निकालते थे।
यह अकल्पनीय क्षति उनके जीवन में एक ऐसा खालीपन छोड़ गई है, जिसे शायद ही कभी भरा जा सके। समाज का हर वर्ग इस समय इस पिता के दर्द को महसूस कर रहा है।
मोक्ष धाम में होगा अंतिम संस्कार
इस असीम पीड़ा की घड़ी में परिवार को सांत्वना देने के लिए शहर के कई गणमान्य नागरिक और प्रशासनिक अधिकारी भी उनके निवास पर पहुंच रहे हैं। हर कोई इस आकस्मिक निधन से गहरे सदमे में है।
परिजनों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सुरभि खंडेलवाल की अंतिम यात्रा आज (बुधवार) शाम 5 बजे उनके निज निवास ‘बैतूल गंज’ से निकाली जाएगी।
उनका अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ कोठी बाजार स्थित ‘मोक्ष धाम’ में किया जाएगा। इस दौरान जिले के कई बड़े नेता और आम जनता उन्हें अपनी भावभीनी और अंतिम विदाई देने के लिए मौजूद रहेंगे।
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युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामले: एक गंभीर चिंता
सुरभि का महज 34 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक से निधन एक बार फिर उस गंभीर मेडिकल बहस को जन्म देता है, जो आज के समय में पूरे देश को डरा रही है। कम उम्र में हृदयाघात अब एक आम लेकिन बेहद खतरनाक समस्या बन गया है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में हार्ट अटैक के पीछे अनियमित जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव और कई बार कुछ छिपी हुई जेनेटिक या क्रोनिक बीमारियां भी जिम्मेदार होती हैं।
सुरभि के मामले में, चूंकि वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उनका नियमित इलाज चल रहा था, ऐसे में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ने वाले भारी दबाव ने भी इस हृदयाघात में एक बड़ी भूमिका निभाई होगी।
यह घटना हम सभी के लिए एक कड़ा सबक भी है कि हमें अपने और अपने परिजनों के स्वास्थ्य को लेकर कभी भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। डॉक्टरों की सलाह का पालन करना आज के दौर में सबसे बड़ी जरूरत है।