नई दिल्ली | 12 अप्रैल 2026: दिल्ली और पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के भीतर एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। शराब घोटाले और केंद्रीय एजेंसियों की लंबी जांच से बाहर आने के बाद, अब पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को अपनों से ही सबसे बड़ा धोखा मिलने वाला है। राजनीति के गलियारों में यह खबर आग की तरह फैल रही है कि केजरीवाल का सबसे चहेता और कोर टीम का अहम सदस्य अब पार्टी से पूरी तरह बगावत करने के मूड में आ गया है।
‘खबर आंगन’ की राजनीतिक डेस्क ने इस बड़ी बगावत और दिल्ली की सत्ता के गलियारों में चल रही अंदरूनी खींचतान की पूरी इनसाइड स्टोरी निकाली है। आइए जानते हैं कि मुश्किल वक्त में आखिर किसने केजरीवाल का साथ छोड़ दिया और पार्टी के भीतर यह दरार इतनी गहरी कैसे हो गई।
कैसे शुरू हुई आम आदमी पार्टी के अंदर यह बड़ी दरार?
इस बगावत का मुख्य चेहरा कोई और नहीं, बल्कि राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा हैं। राजनीति में बहुत कम उम्र में तेजी से सीढ़ियां चढ़ने वाले चड्ढा और पार्टी के बीच अब दूरियां साफ नजर आने लगी हैं।
सूत्रों की मानें तो जब अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में गिरफ्तार किया गया था, तब चड्ढा आंखों की सर्जरी के नाम पर ब्रिटेन में थे। उनकी इस गैरमौजूदगी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के मन में कई सवाल खड़े कर दिए थे। हद तो तब हो गई जब हाल ही में केजरीवाल और अन्य नेताओं को मामले में क्लीन चिट मिली, तो चड्ढा ने न तो सोशल मीडिया पर कोई खुशी जताई और न ही वह पार्टी मुख्यालय के जश्न में शामिल हुए।
पार्टी ने छीना बड़ा पद, अब क्या होगा अगला कदम?
बगावत के इन साफ संकेतों को देखते हुए पार्टी आलाकमान ने भी सख्त रुख अपना लिया है। बीते 2 अप्रैल को ही उन्हें राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा, हाल के दिनों में चड्ढा ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों और कई अहम बैठकों से भी पूरी तरह किनारा कर लिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आम आदमी पार्टी का इतिहास पुराने और बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने से भरा रहा है। प्रशांत भूषण से लेकर कुमार विश्वास और हाल ही में स्वाति मालीवाल तक, केजरीवाल के कई पुराने साथी उनका साथ छोड़ चुके हैं। अब चड्ढा का यह बागी तेवर पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है।
हमारा निष्कर्ष
‘खबर आंगन’ की राजनीतिक डेस्क का यह साफ तौर पर मानना है कि आम आदमी पार्टी इस वक्त अपने सबसे मुश्किल अंदरूनी दौर से गुजर रही है। जब किसी पार्टी के सबसे भरोसेमंद नेता और ‘सुपर सीएम’ कहे जाने वाले चेहरे ही मुश्किल वक्त में किनारा करने लगें, तो पार्टी के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े होना लाजमी है। अब देखना यह है कि अरविंद केजरीवाल इस बड़ी बगावत को कैसे रोकते हैं। देश की हर बड़ी राजनीतिक हलचल के लिए हमारे साथ लगातार बने रहें।
Disclaimer: यह खबर ‘खबर आंगन’ की राजनीतिक डेस्क द्वारा राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स, हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के आधार पर तैयार की गई है। नेताओं के अगले कदम को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
- कंगना रनौत के बयान पर बाबा रामदेव का पलटवार, बोले- ‘ओछे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता’
- वंदे मातरम् पर कांग्रेस के फैसले के बीच शशि थरूर ने साफ किया रुख, बोले- पार्टी की पुरानी परंपरा आगे भी जारी रहेगी
- वंदे मातरम् विवाद पर कंगना रनौत ने शर्मिला टैगोर को घेरा, बोलीं हिंदू-मुस्लिम मानसिकता से बाहर आइए
- सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी से दिल्ली में सियासी हलचल, 6 लोग पकड़े गए, जानिए किस केस में हुई कार्रवाई
- दिल्ली हाईकोर्ट में CBI की जल्दबाजी पर केजरीवाल और सिसोदिया का हमला, याचिका खारिज करने की मांग
आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।



