बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। देश के राष्ट्रपति Mohammed Shahabuddin ने अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेंगे और फरवरी में होने वाले आम चुनावों के बाद राष्ट्रपति भवन छोड़ देंगे। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश एक नाजुक राजनीतिक दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति ने अंतरिम सरकार पर उन्हें अपमानित करने और किनारे करने का आरोप लगाया है।
यह खबर ढाका से लेकर दिल्ली तक सुर्खियों में है। Mohammed Shahabuddin ने एक इंटरव्यू में अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे अब इस पद पर नहीं रहना चाहते। उन्होंने बताया कि नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने उन्हें पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया है। यह स्थिति उनके लिए असहनीय हो गई है और इसीलिए उन्होंने चुनाव के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।
राष्ट्रपति के इस कदम ने बांग्लादेश की संवैधानिक व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद Mohammed Shahabuddin ही एकमात्र संवैधानिक प्राधिकारी बचे थे। उनका जाना देश के लिए एक नई चुनौती बन सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि राष्ट्रपति ने अपने इस्तीफे के पीछे क्या कारण बताए हैं और इसका बांग्लादेश के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।
Mohammed Shahabuddin का दर्द: “मुझे अपमानित महसूस हुआ”
राष्ट्रपति Mohammed Shahabuddin ने अपने इस्तीफे के पीछे सबसे बड़ा कारण “अपमान” बताया है। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार के गठन के बाद से ही उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने पिछले सात महीनों में उनसे एक बार भी मुलाकात नहीं की है। एक राष्ट्रपति के लिए यह स्थिति बेहद अपमानजनक है जब देश का कार्यकारी प्रमुख उनसे बात तक नहीं करता।
सबसे ज्यादा दुख उन्हें तब हुआ जब रातों-रात दुनिया भर के बांग्लादेशी दूतावासों से उनकी तस्वीरें हटा दी गईं। Mohammed Shahabuddin ने बताया कि सितंबर महीने में एक आदेश के जरिए सभी हाई कमीशन और एंबेसी से उनकी फोटो हटाने का फरमान जारी किया गया। उन्होंने कहा कि यह सब अचानक हुआ और उन्हें इसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। इससे न केवल उन्हें व्यक्तिगत ठेस पहुंची बल्कि राष्ट्रपति पद की गरिमा भी धूमिल हुई।