नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026 — ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के केंद्र में बना हॉर्मुज अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ वैश्विक तेल और समुद्री व्यापार के लिए भी अहम हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका के पास रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर “पूरा नियंत्रण” है। दूसरी ओर ईरान अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए लगातार इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण होने की बात कह रहा है। इसी बीच हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बेहद कम बनी हुई है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों को लेकर चिंता बढ़ी है।
ट्रंप ने हॉर्मुज को लेकर क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अमेरिका की सैन्य स्थिति को मजबूत बताते हुए दावा किया कि अमेरिका के पास इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर पूरा नियंत्रण है। इससे पहले भी ट्रंप हॉर्मुज को लेकर कई कड़े बयान दे चुके हैं। उन्होंने यहां तक कहा था कि अमेरिका जल्द ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने पर विचार कर सकता है। हालांकि, यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद का विषय बन गया है और ईरान ने इसे सीधे तौर पर खारिज किया है।
ईरान ने अमेरिका के दावे को किया खारिज
तेहरान ने अमेरिका के हॉर्मुज पर दावे को स्वीकार नहीं किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज ईरान के नियंत्रण और प्रबंधन में है तथा इसे कब खोला या बंद किया जाएगा, इसका फैसला ईरान की शर्तों पर होगा। ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य शक्ति और उसके नियंत्रण के दावे को चुनौती दी गई है। इस टकराव ने दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है।
मिसाइल और ड्रोन की चुनौती भी बनी हुई है
हॉर्मुज संकट केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र में समुद्री यातायात और सैन्य गतिविधियों को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है। मिसाइल और ड्रोन जैसे हथियारों की मौजूदगी के कारण व्यापारिक जहाजों के लिए जोखिम बढ़ा है। अमेरिका ने पहले भी समुद्री मार्ग की सुरक्षा और ईरानी सैन्य गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की है। दूसरी तरफ ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता और जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका को चुनौती दी है। ऐसे में दोनों देशों के दावों के बीच वास्तविक स्थिति लगातार अंतरराष्ट्रीय निगरानी का विषय बनी हुई है।
हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही कितनी घट गई?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। मौजूदा संकट के बीच यहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की संख्या में भारी कमी आई है। रॉयटर्स के अनुसार 20 अगस्त को केवल सात कमोडिटी जहाज इस जलमार्ग से गुजरे, जबकि इससे एक दिन पहले यह संख्या 14 थी। सामान्य परिस्थितियों में हॉर्मुज से वैश्विक कच्चे तेल और LNG की करीब पांचवीं हिस्सेदारी गुजरती रही है। ऐसे में मौजूदा व्यवधान का असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता।
तेल की कीमतों और दुनिया की चिंता क्यों बढ़ी?
हॉर्मुज दुनिया के प्रमुख तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है। यहां लंबे समय तक आवाजाही बाधित रहने पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ता है। पहले से ही जारी अमेरिका-ईरान तनाव ने ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। जहाजों की कम आवाजाही, बीमा लागत और सुरक्षा जोखिम बढ़ने से कंपनियों के लिए परिवहन महंगा हो सकता है। इसका असर आगे चलकर एशिया और यूरोप जैसे बड़े ऊर्जा आयातक क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी अटकी
हॉर्मुज को लेकर सैन्य और राजनीतिक टकराव ऐसे समय जारी है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। ट्रंप ने अलग-अलग मौकों पर बातचीत को लेकर अलग संकेत दिए हैं, जबकि ईरान ने हॉर्मुज को खोलने के लिए अपनी शर्तें रखी हैं। इसी वजह से जलमार्ग को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है, जबकि तेहरान अमेरिकी मांगों के सामने झुकने से इनकार करता दिख रहा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल हॉर्मुज पर ट्रंप का दावा और ईरान की ओर से उसका विरोध दोनों ही इस संकट की गंभीरता को दिखाते हैं। अमेरिका अपने सैन्य प्रभाव और समुद्री नियंत्रण को लेकर मजबूत स्थिति का संदेश दे रहा है, जबकि ईरान हॉर्मुज पर अपने अधिकार को चुनौती देने वाली किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं कर रहा। आने वाले दिनों में जहाजों की आवाजाही, तेल की कीमतों और दोनों देशों के बीच बातचीत की स्थिति इस संकट की दिशा तय करने में अहम होगी। अगर जलमार्ग पर लंबे समय तक सामान्य यातायात बहाल नहीं हुआ तो इसका असर खाड़ी क्षेत्र से बाहर वैश्विक ऊर्जा बाजार तक महसूस किया जा सकता है।
Disclaimer: यह खबर अमेरिकी और ईरानी पक्ष के सार्वजनिक बयानों तथा उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। हॉर्मुज पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं और स्थिति तेजी से बदल सकती है।
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