नई दिल्ली | 5 मार्च 2026: हिंद महासागर की शांत लहरों पर अचानक युद्ध के गहरे और खौफनाक बादल घिर आए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से सुलग रहा तनाव अब खाड़ी देशों की सीमाओं को पार कर चुका है। यह आग अब सीधे तौर पर भारतीय समुद्री क्षेत्र के बेहद करीब पहुंच गई है।
बुधवार तड़के एक बेहद चौंकाने वाली घटना में, अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के करीब ईरान के एक प्रमुख युद्धपोत को अपना निशाना बनाया। अमेरिकी नौसेना ने पूरी सटीकता के साथ इस युद्धपोत को टॉरपीडो से उड़ा दिया।
यह हमला इतना भीषण, अचानक और अचूक था कि कुछ ही मिनटों के भीतर पूरा का पूरा युद्धपोत समंदर की गहराइयों में समा गया। इस अप्रत्याशित और खौफनाक सैन्य कार्रवाई ने पूरी दुनिया की नौसेनाओं को हाई अलर्ट पर ला दिया है।
इस भीषण हमले के तुरंत बाद, मानवीय आधार पर और अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को निभाते हुए Indian Navy ने समंदर में एक बहुत बड़ा और व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। समंदर में डूबते नौसैनिकों की जान बचाने के लिए भारत ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हमले का शिकार हुआ यह ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ (IRIS Dena) था। सबसे संवेदनशील बात यह है कि यह युद्धपोत भारत में आयोजित एक बड़े बहुपक्षीय नौसैन्य अभ्यास से हिस्सा लेकर वापस अपने देश लौट रहा था।
विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना का खास मेहमान था ‘IRIS Dena’
यह पूरी घटना कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों ही मायनों से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। दरअसल, ईरानी नौसेना का यह युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ कोई आम जहाज नहीं था। यह एक स्वदेशी रूप से निर्मित मौज-क्लास (Moudge-class) का बेहद उन्नत फ्रिगेट था।
यह जहाज कई घातक मिसाइलों, राडार और आधुनिक एंटी-सबमरीन टॉरपीडो सिस्टम से पूरी तरह लैस था। पिछले महीने ही यह युद्धपोत विशाखापट्टनम में आयोजित ‘मिलन 2026’ (MILAN-2026) नौसैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए भारत आया था।
RECOMMEND FOR YOUSPONSORED
इस भव्य अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में कई मित्र देशों के युद्धपोतों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था। भारत ने भी एक मेजबान के तौर पर इस ईरानी जहाज का पूरे सम्मान और सैन्य परंपराओं के साथ स्वागत किया था।
कार्यक्रम के सफल समापन के बाद, यह युद्धपोत वापस फारस की खाड़ी (Persian Gulf) की ओर अपनी वापसी की यात्रा पर था। इसी दौरान, जब यह जहाज श्रीलंका के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) के पास से गुजर रहा था, तभी अमेरिका ने इसे ट्रैक करके तबाह कर दिया।
हमले के बाद समंदर में मची चीख-पुकार और अफरातफरी के बीच सबसे पहली और प्रभावी प्रतिक्रिया भारत और श्रीलंका की तरफ से देखने को मिली है। Indian Navy ने इस पूरी घटना को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए अपने रेस्क्यू ऑपरेशन्स की पूरी टाइमलाइन साझा की है।
नौसेना के रक्षा प्रवक्ताओं के अनुसार, 4 मार्च 2026 की तड़के कोलंबो के मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर (MRCC) को ईरानी युद्धपोत से एक डिस्ट्रेस कॉल (आपातकालीन संदेश) मिला था। यह जहाज श्रीलंका के गाले (Galle) तट से लगभग 20 नॉटिकल मील दूर समंदर में तेजी से डूब रहा था।
डूबने की सूचना मिलते ही Indian Navy ने बिना एक भी पल गंवाए तुरंत हरकत में आने का फैसला किया। सुबह करीब 10 बजे भारतीय नौसेना ने अपने लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान (Maritime Patrol Aircraft) को इलाके की टोह लेने के लिए रवाना कर दिया।
इस विमान का मुख्य मकसद समंदर की लहरों के बीच बचे हुए लोगों को खोजना था। इसके साथ ही, उस इलाके के करीब पहले से गश्त कर रहे भारतीय नौसेना के जहाज ‘आईएनएस तरंगिनी’ (INS Tarangini) को भी बचाव कार्य में मदद के लिए तुरंत घटनास्थल की ओर डायवर्ट कर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की मानवीय पहल
इस त्वरित और विशाल रेस्क्यू अभियान ने दुनिया भर में यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की नीति क्या है। भले ही भारत अमेरिका और ईरान के इस सैन्य तनाव में एक तटस्थ रुख अपना रहा हो, लेकिन जब बात समंदर में मानवीय सहायता की आती है, तो भारतीय नौसेना हमेशा सबसे आगे खड़ी रहती है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों (SAR Convention) के तहत, किसी भी देश की नौसेना का यह पहला कर्तव्य होता है कि वह समंदर में फंसे और डूबते हुए लोगों की जान बचाए। भारत ने इसी नियम और अपनी प्राचीन मानवीय परंपरा का पूरी ईमानदारी से पालन किया है।
श्रीलंका के तट पर खौफनाक मंजर और मौतों का आंकड़ा
हमले की जगह का नजारा बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाला था। श्रीलंकाई नौसेना जब अपने बचाव जहाजों के साथ वहां पहुंची, तो विशाल ईरानी युद्धपोत पूरी तरह से डूब चुका था। समंदर की सतह पर सिर्फ तेल का एक बहुत बड़ा रिसाव और जहाज का कुछ मलबा तैरता हुआ दिखाई दे रहा था।
रक्षा सूत्रों के अनुमान के मुताबिक, इस युद्धपोत पर लगभग 180 ईरानी नौसैनिक सवार थे। अब तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में गाले के करपिटीया (Karapitiya) अस्पताल में 87 नौसैनिकों के शवों को लाया जा चुका है।
वहीं, भारतीय और श्रीलंकाई नौसेना की कड़ी मशक्कत के बाद 32 नौसैनिकों को समंदर की उफनती लहरों से जिंदा निकाला गया है। हालांकि, इनमें से कई जवानों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।
बाकी बचे करीब 60 क्रू मेंबर्स की तलाश के लिए अभी भी गश्ती विमान लगातार समंदर के ऊपर उड़ान भर रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उनके जिंदा बचने की उम्मीदें भी कम होती जा रही हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका का यह पहला सीधा हमला
पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) ने इस विनाशकारी हमले की आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है। अमेरिकी रक्षा सचिव ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए साफ तौर पर स्वीकार किया कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोया है।
आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।
₹
उन्होंने इसे एक “शांत मौत” (Quiet death) करार दिया। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने जानबूझकर टॉरपीडो का इस्तेमाल करके किसी देश के जहाज को पूरी तरह से डुबोया है।
यह बयान इस बात का साफ संकेत है कि अमेरिका और ईरान के बीच का संघर्ष अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अब तक अमेरिका और ईरान का तनाव मुख्य रूप से लाल सागर (Red Sea) तक ही सीमित था, लेकिन अब यह सीधा भारत के सामरिक पिछवाड़े (Strategic Backyard) में आ चुका है।
हमारा निष्कर्ष (Expert Verdict)
हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत का डूबना कोई मामूली घटना नहीं है। यह इस क्षेत्र में मंडराते तीसरे विश्व युद्ध के काले बादलों की एकदम स्पष्ट आहट है।
यह हमला ठीक उस वक्त हुआ जब युद्धपोत भारतीय नौसेना के सैन्य अभ्यास से लौट रहा था। कूटनीतिक रूप से यह भारत और समूचे दक्षिण एशिया के लिए एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है।
हालांकि, संकट की इस घड़ी में Indian Navy ने त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर शानदार काम किया है। इससे भारत ने अपनी मानवीय प्रतिबद्धता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के प्रति अपना सम्मान बखूबी साबित किया है।
‘Khabar Aangan’ डेस्क का मानना है कि अब दुनिया की नज़रें इस बात पर टिकी होंगी कि ईरान इस विनाशकारी हमले का क्या और कैसा जवाब देता है। साथ ही, भारत अपने पड़ोस में पनप रहे इस नए सैन्य संकट से अपनी समुद्री सीमाओं और व्यापारिक रास्तों को कैसे सुरक्षित रखता है।
Disclaimer: यह खबर आधिकारिक नौसैन्य बयानों, रक्षा मंत्रालयों की प्रेस ब्रीफिंग और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के वेरिफाइड रियल-टाइम डेटा पर आधारित है। ‘Khabar Aangan’ न्यूज़ डेस्क अपने पाठकों तक निष्पक्ष, सटीक और ग्राउंड-जीरो की तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
इस खबर को शेयर करें
Khabar Aangan Admin
Khabar Aangan एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो सूचना से सच्चाई तक की यात्रा को समर्पित है। हमारा उद्देश्य है—स्थानीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय घटनाओं तक, हर खबर को गहराई, संदर्भ और निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करना। हम परंपरागत पत्रकारिता को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ते हैं, ताकि पाठकों को मिले स्पष्ट, विश्वसनीय और प्रभावशाली जानकारी। चाहे बात हो प्रशासनिक विफलता की, या सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता की, या सामाजिक बदलाव की—Khabar Aangan हर विषय को संवेदनशीलता और साहस के साथ उठाता है।