मधुबनी, 28 सितंबर 2026। मधुबनी जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अब जर्जर भवन, पीने के पानी की किल्लत और बदहाल शौचालयों जैसी समस्याओं के बीच बच्चों को पढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी। जिलाधिकारी आनंद शर्मा के नेतृत्व में जिले भर के सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने का एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को चुस्त-दुरुस्त करने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
डीएम आनंद शर्मा ने साफ़ किया है कि अब हर एक स्कूल की ज़मीनी ज़रूरत को अलग से नापा जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद मौके पर जाकर देखें कि किस स्कूल में कितने बच्चे हैं, भवन की क्या हालत है और वहां बिजली, पानी व शौचालय की क्या स्थिति है। जिस स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की सबसे ज़्यादा किल्लत है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले काम शुरू करवाया जाएगा ताकि बच्चों की पढ़ाई बिल्कुल प्रभावित न हो।
स्कूल भवनों की सुरक्षा को लेकर भी कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। जिले के जर्जर और टूटे-फूटे स्कूल परिसरों को चिह्नित कर उनकी तुरंत मरम्मत कराई जाएगी। क्लासरूम के फर्श, छत, खिड़की-दरवाजे और बिजली के ढीले तारों को ठीक करके ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जहाँ बच्चे बिना किसी डर के सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर सकें। प्रशासन का पूरा ध्यान स्कूल परिसर को हर लिहाज से सुरक्षित और अध्ययन के अनुकूल बनाने पर केंद्रित है।
पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की सेहत और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डीएम ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए अलग और पूरी तरह चालू शौचालय होने चाहिए। इसके अलावा साफ पानी की व्यवस्था और जलजमाव से मुक्ति के लिए बेहतर ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा। जहाँ भी इन सुविधाओं में कमी पाई जाएगी, वहाँ तय समय-सीमा के भीतर अफ़सरों को आपसी तालमेल बैठाकर व्यवस्था ठीक करनी होगी।
सिर्फ इमारतें ही नहीं चमकाई जाएंगी, बल्कि बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए भी बड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। अब तक बंद या धूल फांक रही लाइब्रेरी, साइंस लैब, कंप्यूटर रूम और खेलकूद के सामानों को तुरंत चालू करने का आदेश दिया गया है। जो संसाधन पहले से मौजूद हैं, उनका सही इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर स्कूलों के लिए नए डिजिटल उपकरण व अन्य शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
कामों में किसी भी तरह की धांधली या लापरवाही न हो, इसके लिए अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय कर दी गई है। प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारी लगातार स्कूलों का अचानक निरीक्षण करेंगे और अपनी रिपोर्ट सीधे डीएम को सौंपेंगे। साफ कह दिया गया है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। काम पूरा होने के बाद उसकी तकनीकी जांच होगी, तभी ठेकेदारों का भुगतान आगे बढ़ेगा।
जिला प्रशासन की इस पहल का असली मकसद सिर्फ दीवारें रंगना नहीं, बल्कि पूरे जिले में शिक्षा का एक बेहतर माहौल तैयार करना है। इसके साथ-साथ शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और बच्चों के स्कूल आने पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। डीएम आनंद शर्मा ने अधिकारियों से कहा है कि वे जिम्मेदारी के साथ काम करें, ताकि ‘सेवा संकल्प अभियान’ का फायदा हर गाँव और कसबे के आम गरीब बच्चे तक सीधा पहुँच सके।
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