इस मौजूदा LPG Crisis के कारण बड़े होटलों से लेकर छोटे ढाबों तक की रसोई ठप पड़ने की कगार पर आ गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई जगहों पर एडवांस बुकिंग रद्द होने का खतरा मंडराने लगा है।
इस अभूतपूर्व संकट को देखते हुए ‘ओडिशा होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन’ (HRAO) ने केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय से तत्काल मदद की मांग की है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष जे.के. मोहंती ने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को इस गंभीर विषय पर एक आपातकालीन पत्र लिखा है।
उन्होंने अपनी अपील में स्पष्ट रूप से मांग की है कि देश के पर्यटन उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए।
होटल और रेस्टोरेंट उद्योग अपनी दैनिक रसोई की जरूरतों के लिए पूरी तरह से कमर्शियल एलपीजी गैस (19 किलो वाले बड़े सिलेंडर) पर निर्भर होता है।
चूंकि व्यावसायिक उपयोग के लिए घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है, इसलिए होटल मालिक पूरी तरह से तेल कंपनियों की कमर्शियल सप्लाई चेन पर ही आश्रित रहते हैं।
HRAO के अनुसार, इस सप्लाई चेन में आई अचानक रुकावट ने खाने की तैयारी और फूड सर्विसिंग (Food Servicing) के पूरे सिस्टम को बुरी तरह से पंगु बना दिया है।
पुरी के होटलों में बचा है सिर्फ 2 दिन का गैस स्टॉक
इस बड़े LPG Crisis का सबसे डरावना और सीधा असर ओडिशा के विश्वप्रसिद्ध तटीय शहर पुरी में देखने को मिल रहा है। पुरी में हर दिन देश-विदेश से हजारों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आते हैं।
यहां के कई प्रमुख होटल संचालकों ने एक साझा बयान जारी करते हुए चेतावनी दी है कि उनके पास अब केवल अगले एक या दो दिन का ही गैस स्टॉक (Backup) बचा हुआ है।
अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सुचारू नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरन पर्यटकों को खाना परोसना बंद करना पड़ेगा। इसके चलते होटलों को अपनी एडवांस बुकिंग भी रद्द करनी पड़ सकती है, जिससे भारी नुकसान होगा।
अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ेगा गहरा प्रभाव
होटल और रेस्टोरेंट केवल खाना ही नहीं बेचते, बल्कि यह एक विशाल ‘पर्यटन परिस्थितिकी तंत्र’ (Tourism Ecosystem) का एक बेहद ही महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
HRAO के अध्यक्ष ने बताया कि इस उद्योग से लाखों कर्मचारियों की आजीविका सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। रसोई गैस की कमी से न केवल होटल कर्मचारी, बल्कि पूरी सप्लाई चेन खतरे में आ गई है।
यदि होटल बंद होते हैं, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर स्थानीय सब्जी विक्रेताओं, पोल्ट्री फार्मिंग करने वाले किसानों, ट्रांसपोर्टर्स और दिहाड़ी मजदूरों की दैनिक आय पर भी पड़ना तय है।
भारत की वैश्विक छवि और पर्यटन पर उठेगा सवाल
एक तरफ भारत सरकार विभिन्न राष्ट्रीय पहलों (National Initiatives) के तहत पर्यटन को विश्व स्तर पर बहुत तेजी से बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी ढांचे की यह नाकामी एक गलत संदेश भेज रही है।
जे.के. मोहंती ने स्पष्ट किया कि गैस जैसी अति-आवश्यक सेवाओं में यह अचानक आई रुकावट घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों पर्यटकों के अनुभव को बुरी तरह से खराब कर सकती है।
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ऐसी परिचालन संबंधी बाधाओं (Operational Disruptions) से देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों की साख (Reputation) गिर सकती है और विदेशी यात्रियों के बीच एक अविश्वास की भावना पैदा हो सकती है।
दक्षिण भारत के कई राज्य भी किल्लत से हैं परेशान
यह कमर्शियल गैस आपूर्ति का संकट केवल ओडिशा राज्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य महानगर भी इस किल्लत से बुरी तरह जूझ रहे हैं।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी बेंगलुरु और उत्तरी कर्नाटक में फैले इस कमर्शियल LPG Crisis को लेकर गहरी चिंता जताई है और केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर त्वरित समाधान मांगा है।
इसके अलावा, चेन्नई के कई बॉटलिंग प्लांट्स में सिलेंडरों की भराई पूरी तरह रुकी हुई है। वहीं, हैदराबाद के करीब 74,000 छोटे-बड़े रेस्टोरेंट भी इस वक्त भारी दबाव और गैस की कमी में काम कर रहे हैं।