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Starlink को भारत में मिली ग्रीन सिग्नल, Jio और Airtel के लिए क्यों है यह ‘खतरे की घंटी’?

Starlink को भारत सरकार से महत्वपूर्ण लाइसेंस मिलने का अंतिम चरण शुरू। यह लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट सेवा 2026 में शुरू हो सकती है और ग्रामीण भारत में क्रांति लाएगी।
Ashutosh Kumar Jha Published on: 9 दिसम्बर 2025
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एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink को लेकर भारत में चल रहा लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है। सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने Starlink को देश में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण लाइसेंस देने का अंतिम चरण शुरू कर दिया है।

यह खबर भारत के दूरसंचार (Telecom) बाजार के लिए किसी बड़े धमाके से कम नहीं है। Starlink के आने से न केवल जियो (Jio) और एयरटेल (Airtel) जैसी कंपनियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलेगी, बल्कि यह ग्रामीण और दुर्गम (Remote) इलाकों की डिजिटल तस्वीर पूरी तरह बदल देगा।

Starlink दुनिया की पहली ऐसी कंपनी है जो लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में हजारों छोटे सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करके हाई-स्पीड इंटरनेट प्रदान करती है। इसकी स्पीड 300 Mbps तक जा सकती है, और इसका लेटेंसी (Latency) टाइम पारंपरिक ब्रॉडबैंड से काफी कम होता है।

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सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि Starlink हिमालय और पूर्वोत्तर भारत जैसे उन क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी पहुंचा सकता है, जहाँ फाइबर ऑप्टिक्स या 5G टावर बिछाना महंगा और असंभव है।

1. Starlink को हरी झंडी: लाइसेंसिंग का ‘राज’

Starlink के लिए भारत का बाजार हमेशा मुश्किल रहा है। लाइसेंसिंग और नियामक बाधाओं के कारण कंपनी को कई साल इंतजार करना पड़ा।

अंतिम चरण का लाइसेंस

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने Starlink को वाणिज्यिक संचालन (Commercial Operations) शुरू करने के लिए कुछ आवश्यक परमिट देने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह मंजूरी Starlink को भारत में सैटेलाइट टर्मिनल उपकरण आयात करने और अपनी सेवाएं बेचने की अनुमति देगी।

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