शुक्रवार की आधी रात को सिंहवाड़ा नगर पंचायत स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक एटीएम को अत्याधुनिक गैस कटर से काटकर लूटने की एक बहुत बड़ी साजिश रची गई। अगर लुटेरे अपने इस नापाक मंसूबे में कामयाब हो जाते, तो बैंक को लगभग 22 लाख रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ता।
लेकिन कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों और तकनीक से वह बच नहीं सकता। एटीएम में लगे एक स्मार्ट अलार्म सिस्टम और स्थानीय पुलिस की गश्ती टीम की गजब की मुस्तैदी ने इस पूरी साजिश पर पानी फेर दिया।
यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि अपराधियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए हॉलीवुड फिल्मों की तर्ज पर ‘बंदर का मुखौटा’ पहन रखा था। इस दुस्साहसिक वारदात ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
सिंहवाड़ा के इस व्यस्त इलाके में रात के सन्नाटे का फायदा उठाते हुए अपराधियों ने इस पूरी वारदात की स्क्रिप्ट लिखी थी। सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष बसंत कुमार ने घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरी वारदात शुक्रवार की रात ठीक 3 बजकर 8 मिनट पर शुरू हुई।
एटीएम के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों में यह पूरी खौफनाक गतिविधि कैद हो गई है। फुटेज के अनुसार, लाल और नीले रंग की शर्ट पहने दो अज्ञात बदमाश दबे पांव एटीएम बूथ के अंदर दाखिल हुए।
अपनी पहचान छिपाने के लिए दोनों ने अपने चेहरों पर डरावना बंदर का मुखौटा लगा रखा था और हाथों में दस्ताने (Gloves) पहन रखे थे, ताकि फिंगरप्रिंट्स न छूटें। यह साफ दर्शाता है कि दोनों अपराधी बेहद पेशेवर थे और पूरी रेकी करने के बाद ही वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे।
बूथ के अंदर घुसते ही एक बदमाश ने सबसे पहले अपनी जेब से काले रंग का स्प्रे निकाला और उसे एक सीसीटीवी कैमरे के लेंस पर छिड़क दिया, जिससे कैमरा अंधा हो गया। इसके तुरंत बाद, दूसरे बदमाश ने बड़ी ही चालाकी से बूथ में लगे दूसरे कैमरे का तार भी काट दिया।
गैस कटर की चिंगारी और अचानक बज उठा अलार्म
कैमरों को पूरी तरह से निष्क्रिय करने के बाद, अपराधियों को लगा कि अब वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपने बैग से एक भारी गैस कटर और एटीएम तोड़ने वाले अन्य औजार निकाले।
वे बड़ी ही बेखौफी से गैस कटर की मदद से एटीएम मशीन के अगले हिस्से (जहां कैश रखा होता है) को काटने लगे। मशीन को काटने के दौरान निकलने वाली चिंगारियों के बीच वे 22 लाख रुपये तक पहुंचने ही वाले थे, कि तभी उनका दांव उल्टा पड़ गया।
एटीएम मशीन से की जा रही इस भीषण छेड़छाड़ और गैस कटर की तपिश के कारण मशीन के अंदर लगा स्मार्ट सिक्योरिटी अलार्म अचानक जोर-जोर से बजने लगा। यह अलार्म सीधे मुंबई स्थित एटीएम के मुख्य सुरक्षा सर्वर से जुड़ा हुआ था।
जैसे ही अलार्म बजा, सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे अधिकारी के सिस्टम पर खतरे का रेड अलर्ट फ्लैश होने लगा। अधिकारी ने बिना एक भी पल गंवाए तुरंत इस घटना की सूचना एटीएम बूथ के मकान मालिक और स्थानीय सिंहवाड़ा थाने को दे दी।
हूटर की आवाज ने बचाई 22 लाख की भारी रकम
थाने में सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। रात की गश्त कर रहे दरोगा कमलेश मिश्रा ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत भांप लिया।
उन्होंने बिना कोई देरी किए अपने दल-बल को साथ लिया और पुलिस वाहन से सीधे घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। जब लुटेरे गैस कटर से मशीन का आखिरी हिस्सा काटने की जद्दोजहद कर रहे थे, तभी उन्हें दूर से आती हुई पुलिस की गाड़ी के हूटर (सायरन) की तेज आवाज सुनाई दी।
पुलिस के सायरन की गूंज सुनते ही इन ‘बंदर’ वाले लुटेरों के हाथ-पैर फूल गए। पकड़े जाने और एनकाउंटर के खौफ से दोनों अपराधियों ने अपना गैस कटर और औजार वहीं छोड़ दिए।
उन्होंने एटीएम बूथ से बाहर छलांग लगाई और रात के घने अंधेरे का पूरा फायदा उठाते हुए वहां से रफूचक्कर हो गए। दरोगा कमलेश मिश्रा और उनकी टीम ने भागते हुए चोरों की दिशा में उनका काफी दूर तक पीछा भी किया, लेकिन रात के अंधेरे और संकरी गलियों के कारण अपराधी पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब रहे।
एफएसएल (FSL) और टेक्निकल टीम की सघन जांच शुरू
इस घटना के तुरंत बाद घटनास्थल को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। मौके पर पहुंची एफएसएल (Forensic Science Laboratory) और स्थानीय पुलिस की टेक्निकल टीम ने अपनी वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी है।
टीम एटीएम बूथ के अंदर छूटे हुए गैस कटर, औजारों और फिंगरप्रिंट्स के निशानों को इकट्ठा कर रही है। इसके अलावा, टेक्निकल टीम उस पूरे इलाके में, सड़कों और चौराहों पर लगे सभी प्राइवेट सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अपराधी किस रास्ते से आए थे और भागने के लिए उन्होंने किस वाहन का इस्तेमाल किया। बैंक के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत की सांस ली है।
अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से बताया कि घटना के वक्त उस मशीन के अंदर लगभग 22 लाख रुपये की भारी नकदी मौजूद थी। अगर अलार्म बजने में थोड़ी भी देरी होती या पुलिस समय पर नहीं पहुंचती, तो यह पूरी रकम लूट ली जाती।
अपराधियों की जल्द होगी गिरफ्तारी: सदर एसडीपीओ
घटना की गंभीरता को देखते हुए Darbhanga के सदर एसडीपीओ-2 (SDPO-2) एस.के. सुमन भी तुरंत घटनास्थल का मुआयना करने पहुंच गए। उन्होंने पुलिस बल और जांच टीमों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
एसडीपीओ एस.के. सुमन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, “पुलिस की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से एक बहुत बड़ी वारदात टल गई है। हालांकि अपराधी भागने में सफल रहे हैं, लेकिन हम सभी बिंदुओं पर बहुत ही बारीकी से जांच कर रहे हैं।”
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उन्होंने आगे भरोसा दिलाते हुए कहा कि, “मुखौटे के पीछे छिपे इन चेहरों को बेनकाब करने के लिए एक विशेष टीम का गठन कर दिया गया है। जल्द ही इस घटना में शामिल दोनों शातिर चोरों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।”
हमारा निष्कर्ष
सिंहवाड़ा में हुई यह घटना बिहार के सभी बैंकों और एटीएम सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ा अलर्ट है। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आज के अपराधी तकनीक का इस्तेमाल करने में पुलिस से दो कदम आगे रहने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, इस बार एटीएम के अंदर लगे स्मार्ट अलार्म और Darbhanga पुलिस के त्वरित एक्शन ने लाखों रुपये लूटने से बचा लिए, जो कि काबिले तारीफ है। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है—आखिर एटीएम बूथों पर रात के समय गार्ड्स की तैनाती क्यों नहीं की जाती?
केवल कैमरों और अलार्म के भरोसे 22 लाख जैसी बड़ी रकम छोड़ देना एक तरह से अपराधियों को खुला निमंत्रण देने जैसा है।
‘Khabar Aangan’ डेस्क प्रशासन और बैंक प्रबंधन से यह अपील करता है कि सुनसान और बाहरी इलाकों में स्थित एटीएम बूथों पर सुरक्षा गार्ड्स की 24 घंटे तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही, रात्रि गश्त को और अधिक सघन किया जाए, ताकि इन नकाबपोश लुटेरों के हौसले पस्त किए जा सकें।
Disclaimer: यह खबर पूरी तरह से पुलिस (SDPO और थानाध्यक्ष) द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी और घटनास्थल के प्रत्यक्ष प्रमाणों पर आधारित है। ‘Khabar Aangan’ न्यूज़ डेस्क आम जनता और बैंक प्रशासन को जागरूक करने के उद्देश्य से इस खबर को जिम्मेदारी के साथ प्रकाशित कर रहा है।