पटना: छठ पूजा, जिसे ‘सूर्य षष्ठी व्रत’ के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति के सबसे कठिन, पवित्र और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली त्योहारों में से एक है । यह चार दिवसीय महापर्व मुख्य रूप से सूर्य देव (सूर्य) और उनकी बहन, षष्ठी देवी (छठी मैया) को समर्पित है । बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश को इसका सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है, लेकिन आज इसकी महत्ता भारतीय उपमहाद्वीप और प्रवासी भारतीयों के माध्यम से पूरे विश्व में फैल चुकी है ।
यह त्योहार हिंदू कैलेंडर के कार्तिक मास (अक्टूबर या नवंबर) की शुक्ल पक्ष की छठी तिथि (षष्ठी) को मनाया जाता है, जो दीपावली के लगभग छह दिन बाद आता है । यह आलेख छठ पूजा के गहरे ऐतिहासिक आधार, कठोर अनुष्ठानों, वैज्ञानिक लाभों और वैश्विक महत्व की विस्तृत व्याख्या करता है, जो इसे केवल एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन की समग्रता का उत्सव बनाता है।
I. परिचय: सूर्य षष्ठी व्रत का अद्वितीय संकल्प
सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है, जो पृथ्वी पर जीवन, प्रकाश, ऊर्जा और स्वास्थ्य के आधार हैं । छठ पूजा की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यह इकलौता प्रमुख हिंदू त्योहार है जिसमें डूबते सूर्य (संध्या अर्घ्य) और उगते सूर्य (उषा अर्घ्य) दोनों की पूजा अनिवार्य है ।
डूबते सूर्य को अर्घ्य देना कृतज्ञता का दार्शनिक प्रतीक है। यह उस ऊर्जा के लिए आभार व्यक्त करता है जो दिन भर प्राप्त हुई, और यह विश्वास दिलाता है कि भले ही प्रकाश ओझल हो जाए, वह चक्र फिर से लौटेगा। यह पर्व प्रत्यूषा (संध्या की देवी) और उषा (भोर की देवी) दोनों का समान सम्मान करता है, जो परिवर्तन और लचीलेपन में आस्था को दर्शाता है ।
देवत्व के आधार: सूर्य देव और छठी मैया
- सूर्य देव (आदित्य): इन्हें स्वास्थ्य, समृद्धि और जीवन शक्ति का दाता माना जाता है । इस दौरान इनकी पूजा से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने और स्वास्थ्य लाभ होने का ज्योतिषीय विश्वास जुड़ा है ।
- छठी मैया (षष्ठी देवी): इन्हें मातृत्व की देवी और बच्चों की रक्षक माना जाता है । धार्मिक ग्रंथों में, उन्हें वैदिक देवी उषा (भोर) का एक रूप माना गया है, जो नई शुरुआत और आशा का प्रतीक हैं । ऐसी मान्यता है कि छठी मैया संतान को दीर्घायु प्रदान करती हैं और उन्हें बीमारियों से बचाती हैं ।
II. इतिहास और पौराणिक जड़ें: वैदिक काल से महाकाव्यों तक
छठ पूजा का इतिहास इतना गहरा है कि यह भारतीय धार्मिक साहित्य के शुरुआती काल तक पहुँचता है, जो इसकी प्राचीनता और प्रामाणिकता को सिद्ध करता है।