दरभंगा, 5 सितंबर 2026: दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के बीच जमीन मालिकों और कब्जाधारियों के लिए एक अहम बात सामने आई है। किसी जमीन पर वर्षों से दखल-कब्जा होना अपने आप में मालिकाना हक का अंतिम आधार नहीं माना जाएगा। सर्वे की प्रक्रिया में मौके की स्थिति दर्ज करने के बाद जमीन से जुड़े कागजात का सत्यापन किया जाएगा और इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक रैयत की स्थिति स्पष्ट होगी।
बिरौल प्रखंड के 38 मौजों में भूमि सर्वेक्षण का काम चल रहा है। इनमें 20 मौजों में किश्तवार प्रक्रिया के तहत प्लाटों को चिह्नित करने का काम पूरा हो चुका है, जबकि 18 मौजों में प्रक्रिया अभी जारी है। सर्वे कर्मी मौके पर पहुंचकर एक-एक प्लाट की पहचान कर रहे हैं और जमीन की स्थिति के साथ दखल-कब्जे से संबंधित जानकारी भी दर्ज कर रहे हैं।
पहले जमीन की पहचान, फिर कागजात की जांच
सर्वे अधिकारी सह सर्वे प्रभारी मोहम्मद मेहबूब के अनुसार पहले चरण में किश्तवार प्रक्रिया के तहत प्रत्येक प्लाट को चिह्नित किया जा रहा है। इसके साथ मौके पर जमीन की वास्तविक स्थिति और उस पर मौजूद दखल-कब्जे से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। इसका मतलब यह है कि सर्वे के दौरान जमीन पर कौन मौजूद है, इसकी जानकारी तो दर्ज होगी, लेकिन केवल इसी आधार पर स्वामित्व तय नहीं किया जाएगा।
इसके बाद दूसरे चरण में जमीन से जुड़े दस्तावेजों का मिलान और सत्यापन किया जाएगा। राजस्व अभिलेख तथा उपलब्ध कागजात के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि संबंधित प्लाट का वास्तविक रैयत कौन है। इसलिए किसी व्यक्ति का जमीन पर कब्जा होना और रिकॉर्ड में उसका रैयत होना दो अलग-अलग बातें हो सकती हैं।
कब्जे में जमीन है तो भी कागजात तैयार रखें
बिरौल में चल रही प्रक्रिया का सीधा मतलब जमीन से जुड़े लोगों के लिए यह है कि वे अपने दस्तावेजों को व्यवस्थित रखें। सर्वे कर्मी प्लाट की पहचान के साथ रैयतों से जमीन से संबंधित आवश्यक जानकारी भी ले रहे हैं। ऐसे में जमीन के पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड में कोई अंतर है तो उसे समय रहते सामने रखना महत्वपूर्ण हो सकता है।
दरभंगा के दूसरे हिस्सों में भी विशेष भूमि सर्वेक्षण के दौरान जमीन मालिकों को खतियान, अद्यतन राजस्व रसीद, एलपीसी और उपलब्ध अन्य संबंधित दस्तावेज तैयार रखने की सलाह दी गई है। पैतृक या पुश्तैनी जमीन के मामलों में वंशावली, खतियान और राजस्व रसीद जैसे दस्तावेज भी उपयोगी बताए गए हैं।
20 मौजों में प्लाट चिह्नित करने का काम पूरा
बिरौल में किश्तवार प्रक्रिया के तहत सर्वे कर्मी निर्धारित लक्ष्य के अनुसार लगातार अलग-अलग प्लाटों तक पहुंच रहे हैं। अमीन शिवम कुमार के मुताबिक हर प्लाट की पहचान की जा रही है और मौके की स्थिति दर्ज की जा रही है। रैयतों से संपर्क कर जमीन से संबंधित जरूरी जानकारी लेने की प्रक्रिया भी साथ चल रही है।
अब तक 20 मौजों में प्लाट चिह्नित किए जाने का काम पूरा होना सर्वे की प्रगति को दिखाता है। बाकी 18 मौजों में प्रक्रिया जारी है। इसके अगले चरण में दस्तावेजों के सत्यापन के बाद जमीन के स्वामित्व संबंधी विवरण को नए अभिलेख में दर्ज करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
जमीन के कागजों में गलती है तो अभी ध्यान दें
भूमि सर्वेक्षण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जमीन मालिक अपने रिकॉर्ड को पहले ही जांच लें। खेसरा, रकबा, रैयत का नाम और उपलब्ध राजस्व दस्तावेजों में अंतर होने पर बाद में परेशानी बढ़ सकती है। विशेष भूमि सर्वेक्षण का उद्देश्य ही भूमि के स्वरूप और स्वामित्व संबंधी विवरण को नए अभिलेख में दर्ज करना है।
इसलिए सर्वे कर्मियों के गांव और प्लाट तक पहुंचने के साथ जमीन मालिकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। केवल यह कहना कि जमीन पर हमारा कब्जा है, पर्याप्त नहीं होगा। जमीन से जुड़े दस्तावेज ही उस दावे को रिकॉर्ड के स्तर पर मजबूत आधार दे सकते हैं। खासकर पैतृक जमीन, पुराने बंटवारे या लंबे समय से चले आ रहे दखल वाले मामलों में उपलब्ध कागजात को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है।
सर्वे के बाद तस्वीर होगी ज्यादा स्पष्ट
बिरौल में चल रही प्रक्रिया के अगले चरण में जब मौके पर दर्ज जानकारी का जमीन के कागजात और राजस्व अभिलेखों से मिलान होगा, तब कई प्लाटों के वास्तविक रिकॉर्ड की तस्वीर और स्पष्ट होगी। जिन जमीनों पर कब्जा और दस्तावेजों में एकरूपता होगी, वहां प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हो सकती है। वहीं रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिलने पर संबंधित दावों की जांच की जरूरत पड़ सकती है।
यही वजह है कि भूमि सर्वेक्षण को केवल जमीन नापने या प्लाट चिह्नित करने की प्रक्रिया मानना सही नहीं होगा। इसके जरिए जमीन के मौके के हालात और उपलब्ध दस्तावेजों को रिकॉर्ड में लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। दरभंगा के जमीन मालिकों के लिए फिलहाल सबसे अहम संदेश यही है कि अपने प्लाट की पहचान के साथ उसके कागजात भी तैयार रखें।
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