पटना, 8 अक्टूबर 2026। हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और मूसलाधार बारिश ने पटना जिले की सड़कों को बुरी तरह छलनी कर दिया था। जगह-जगह बने गड्ढों और टूटी सड़कों के कारण आम लोगों का सफर किसी बुरे सपने से कम नहीं था। लेकिन अब पटनावासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। जिले की सड़कों को दोबारा गड्ढामुक्त और सुगम बनाने के लिए पटना प्रशासन ने ‘मिशन मोड’ में महाभियान छेड़ दिया है। दिन-रात एक करके युद्धस्तर पर सड़कों की मरम्मत की जा रही है, ताकि त्योहारी सीजन में लोगों को आवागमन में कोई तकलीफ न हो।

पटना के जिलाधिकारी (DM) श्री कुंदन कुमार ने खुद इस महा-मरम्मत अभियान की कमान अपने हाथों में ले रखी है। पथ निर्माण विभाग (RCD), ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ लगातार समन्वय बनाकर कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है। प्रशासन की इस चुस्ती का ही नतीजा है कि अब तक जिले भर में 105 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों को नया जीवन दिया जा चुका है और काम पूरी रफ्तार से जारी है।
प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार, बाढ़ और बारिश से जिले भर में कुल 1,103 ऐसे डेंजर स्पॉट (क्षतिग्रस्त स्थल) चिन्हित किए गए थे, जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत थी। राहत की बात यह है कि इनमें से आधे से अधिक यानी 555 जगहों पर मरम्मत का काम पूरी तरह से खत्म कर लिया गया है। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर गांवों को जोड़ने वाली पगडंडियों तक, हर जगह डामर और रोड़ी बिछाने का काम तेजी से चल रहा है।
इस मरम्मत अभियान में सबसे शानदार प्रदर्शन पथ निर्माण विभाग (पश्चिमी प्रमंडल) और NHAI का रहा है। NHAI ने अपने जिम्मे के सभी 130 क्षतिग्रस्त स्थलों को 100% दुरुस्त कर दिया है। वहीं, पश्चिमी प्रमंडल ने भी अपने सभी 129 स्थलों पर काम पूरा कर लिया है। पटना सिटी प्रमंडल में 120 में से 109 जगहों की सूरत बदल दी गई है, जबकि न्यू कैपिटल प्रमंडल के 355 स्थलों में से 92 को चकाचक कर दिया गया है।
ग्रामीण इलाकों की बात करें तो ग्रामीण कार्य विभाग भी पीछे नहीं है। पटना प्रमंडल के 96 में से 53, मसौढ़ी के 18 में से 11, दानापुर के 16 में से 8 और पालीगंज के 73 में से 17 स्थलों पर काम पूरा हो चुका है। हालांकि, बाढ़ प्रमंडल में काम की रफ्तार थोड़ी धीमी है, जहां 166 में से फिलहाल 6 जगहों पर ही काम पूरा हुआ है, लेकिन बाकी जगहों पर मशीनें गरज रही हैं।
जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को सख्त अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि सड़क निर्माण में किसी भी स्तर पर गुणवत्ता (Quality) से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। काम न सिर्फ तय समय-सीमा के भीतर खत्म होना चाहिए, बल्कि सड़क ऐसी बननी चाहिए जो टिकाऊ हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही बरतने वाले इंजीनियरों पर सीधे कार्रवाई होगी।
इस अभियान को पूरी तरह ‘फुल-प्रूफ’ बनाने के लिए डीएम ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों (SDOs) को भी एक खास टास्क दिया है। उन्हें निर्देश है कि वे अपने-अपने इलाकों में खुद घूमें और अगर कोई टूटी सड़क इस 1,103 की सूची से छूट गई है, तो उसे तुरंत खोजकर इंजीनियरों को दें। प्रशासन का सीधा लक्ष्य है कि पटना की एक भी क्षतिग्रस्त सड़क मरम्मत से वंचित न रहे, ताकि जनता को फिर से एक सुगम और सुरक्षित सफर का अनुभव मिल सके।
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