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अटल बिहारी वाजपेयी ने मांगे थे 11 सांसद, कहा था छत्तीसगढ़ दूंगा; प्रधानमंत्री बनने के बाद ऐसे पूरा किया अपना वादा

रायपुर की एक चुनावी सभा में अटल बिहारी वाजपेयी ने 11 सांसद देने पर छत्तीसगढ़ बनाने का वादा किया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस वादे को पूरा किया और 1 नवंबर 2000 को राज्य अस्तित्व में आया।
Khabar Aangan Published on: 16 अगस्त 2026
अटल बिहारी वाजपेयी ने मांगे थे 11 सांसद, कहा था छत्तीसगढ़ दूंगा; प्रधानमंत्री बनने के बाद ऐसे पूरा किया अपना वादा
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रायपुर, 16 अगस्त 2026 — पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर छत्तीसगढ़ के गठन से जुड़ा उनका वह वादा फिर चर्चा में है, जिसने राज्य के निर्माण की राजनीति को नई दिशा दी थी। रायपुर की एक चुनावी सभा में वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ की मांग से जुड़े लोगों के सामने कहा था कि अगर उन्हें 11 सांसद मिल जाएं तो वह छत्तीसगढ़ देंगे। उस समय छत्तीसगढ़ अलग राज्य नहीं था और पूरा क्षेत्र मध्य प्रदेश का हिस्सा था। इसके बाद केंद्र में वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी और करीब एक साल के भीतर अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच गई।

रायपुर की सभा में हुआ था बड़ा राजनीतिक ऐलान

1998-99 के लोकसभा चुनाव के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी चुनाव प्रचार के लिए रायपुर पहुंचे थे। उस समय रायपुर मध्य प्रदेश का हिस्सा था और छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने की मांग लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनी हुई थी। इसी चुनावी सभा में वाजपेयी ने 11 सांसदों के समर्थन से छत्तीसगढ़ देने का वादा किया था। उनका यह बयान स्थानीय राजनीति में तेजी से चर्चा का विषय बना और अलग राज्य की मांग को लेकर उम्मीदों को भी नया बल मिला।

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वाजपेयी के इस बयान का महत्व इसलिए भी था क्योंकि यह सिर्फ चुनावी मंच से किया गया सामान्य राजनीतिक आश्वासन नहीं रह गया। अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन को बहुमत मिला और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद छत्तीसगढ़ के गठन की दिशा में केंद्र स्तर पर औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। यही वजह है कि बाद के वर्षों में वाजपेयी का नाम छत्तीसगढ़ के गठन के इतिहास के साथ खास तौर पर जोड़ा जाने लगा।

प्रधानमंत्री बने तो वादे पर आगे बढ़ी सरकार

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने के बाद छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने का मुद्दा सिर्फ चुनावी वादे तक सीमित नहीं रहा। राज्य निर्माण से जुड़ा प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में आगे बढ़ा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 31 जुलाई 2000 को लोकसभा और 9 अगस्त 2000 को राज्यसभा में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी मिली। इसके बाद 4 सितंबर 2000 को संबंधित कानून का भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन हुआ।

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इसके कुछ ही समय बाद 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया। मध्य प्रदेश से अलग होकर बने इस नए राज्य को देश का 26वां राज्य बनाया गया। इस तरह रायपुर की चुनावी सभा में किया गया वह राजनीतिक वादा करीब दो साल के भीतर एक संवैधानिक और प्रशासनिक वास्तविकता में बदल गया। यही घटनाक्रम आज भी छत्तीसगढ़ के गठन की कहानी में अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाता है।

छत्तीसगढ़ बनने के बाद अजीत जोगी बने पहले मुख्यमंत्री

अलग राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ की पहली सरकार कांग्रेस की बनी और अजीत जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। यानी जिस राज्य के गठन का रास्ता वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में खुला, उसकी पहली निर्वाचित सरकार एक अलग राजनीतिक दल के नेतृत्व में बनी। इसके बावजूद वाजपेयी और जोगी के बीच व्यक्तिगत स्तर पर संवाद बना रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वाजपेयी छत्तीसगढ़ के विकास से जुड़े विषयों को लेकर जोगी से फोन पर जानकारी भी लेते थे।

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यही पहलू वाजपेयी और छत्तीसगढ़ के रिश्ते को केवल राज्य निर्माण तक सीमित नहीं रहने देता। उनके समर्थक उन्हें राज्य का निर्माता मानते हैं, जबकि छत्तीसगढ़ के गठन के बाद शुरुआती विकास से जुड़े फैसलों में भी उनकी सरकार की भूमिका को याद किया जाता है। राज्य बनने के बाद राजनीतिक सत्ता भले ही अलग दल के पास रही हो, लेकिन अलग राज्य के निर्माण का श्रेय वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल से लगातार जोड़ा जाता रहा है।

2004 में शिक्षा के क्षेत्र में भी रखी गई नींव

छत्तीसगढ़ के गठन के बाद अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका को राज्य में शिक्षा के विस्तार से भी जोड़ा जाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2004 में उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में तीन विश्वविद्यालयों की नींव रखी गई। इनमें कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, तकनीकी विश्वविद्यालय दुर्ग और पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर शामिल हैं। इन संस्थानों की स्थापना को राज्य में उच्च शिक्षा और विशेष रूप से तकनीकी, पत्रकारिता तथा दूरस्थ शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

छत्तीसगढ़ से वाजपेयी का जुड़ाव इसी वजह से राजनीतिक स्मृति का हिस्सा बन गया है। अलग राज्य बनाने के फैसले से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में संस्थानों की स्थापना तक, उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के कई फैसले राज्य के शुरुआती विकास से जुड़े रहे। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उनके योगदान को याद करते हुए राज्य निर्माण के उस दौर की चर्चा एक बार फिर सामने आती है।

मध्य प्रदेश से अलग होकर बना था छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ बनने से पहले यह पूरा क्षेत्र मध्य प्रदेश का हिस्सा था। अलग राज्य की मांग के पीछे क्षेत्रीय पहचान, प्रशासनिक सुविधा और विकास से जुड़े सवाल लंबे समय से उठते रहे थे। वर्ष 2000 में संसद की मंजूरी और केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह मांग अलग राज्य के रूप में पूरी हुई। 1 नवंबर 2000 की तारीख इसके इतिहास में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन छत्तीसगढ़ आधिकारिक तौर पर देश के नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

आज छत्तीसगढ़ की अपनी अलग प्रशासनिक, राजनीतिक और आर्थिक पहचान है। लेकिन राज्य के गठन का इतिहास सामने आने पर मध्य प्रदेश से अलग होने की वह लंबी प्रक्रिया भी याद आती है, जिसमें अलग राज्य की मांग करने वाले लोगों के साथ-साथ केंद्र की राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण रही। वाजपेयी के उस चुनावी वादे से लेकर संसद की मंजूरी और अंततः राज्य बनने तक का सफर भारतीय संघीय व्यवस्था में राज्य पुनर्गठन की एक महत्वपूर्ण घटना के तौर पर देखा जाता है।

11 सांसदों वाला बयान क्यों बना यादगार

रायपुर की उस सभा में दिया गया 11 सांसदों वाला बयान आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि इसके बाद घटनाक्रम अपेक्षाकृत तेजी से बदला। वाजपेयी ने चुनावी मंच से छत्तीसगढ़ देने की बात कही, फिर केंद्र में उनकी सरकार बनी और वर्ष 2000 में संसद ने राज्य निर्माण की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी। इस पूरे क्रम ने उस बयान को महज चुनावी भाषण का हिस्सा नहीं रहने दिया।

छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में इस बयान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि अलग राज्य की मांग को केंद्र की सत्ता के स्तर पर स्पष्ट राजनीतिक समर्थन मिला। हालांकि राज्य का निर्माण किसी एक व्यक्ति की इच्छा मात्र से नहीं हुआ, बल्कि इसके लिए संसद की संवैधानिक प्रक्रिया और कानून निर्माण जरूरी था। इसलिए इस कहानी को वाजपेयी के राजनीतिक वादे और उसके बाद पूरी हुई संसदीय प्रक्रिया—दोनों के संदर्भ में देखना अधिक उचित है।

वाजपेयी की पुण्यतिथि पर फिर याद आया वह दौर

16 अगस्त को अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर देशभर में उनके राजनीतिक जीवन और योगदान को याद किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में उनकी चर्चा स्वाभाविक रूप से राज्य निर्माण से भी जुड़ती है। रायपुर की वह सभा, 11 सांसदों वाला वादा और फिर 1 नवंबर 2000 को नए राज्य का अस्तित्व में आना—ये घटनाएं वाजपेयी के राजनीतिक जीवन के उस अध्याय को सामने लाती हैं, जिसने मध्य प्रदेश के नक्शे से एक नया राज्य अलग कर दिया।

छत्तीसगढ़ के लिए वाजपेयी का योगदान सिर्फ राज्य गठन की तारीख तक सीमित करके नहीं देखा जाता। उनके कार्यकाल में शिक्षा से जुड़े संस्थानों की स्थापना और राज्य के विकास को लेकर संवाद भी इस विरासत का हिस्सा हैं। यही वजह है कि उनकी पुण्यतिथि पर जब उनके राजनीतिक जीवन की चर्चा होती है तो छत्तीसगढ़ का गठन उसमें प्रमुख स्थान रखता है। करीब ढाई दशक बाद भी 1 नवंबर 2000 का वह दिन राज्य की राजनीतिक पहचान के इतिहास में उतना ही महत्वपूर्ण है।

Disclaimer: यह खबर छत्तीसगढ़ के गठन से जुड़ी उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और ऐतिहासिक विवरणों के आधार पर तैयार की गई है। वाजपेयी की भूमिका को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं हो सकती हैं, इसलिए लेख में उपलब्ध तथ्यात्मक घटनाक्रम को प्राथमिकता दी गई है।

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