क्या कोई आपकी प्राइवेट फोटो लीक करने की धमकी दे रहा है? ऐसे करें डिलीट, Bihar Police ने बता दिया तरीका
साइबर अपराधियों द्वारा प्राइवेट तस्वीरें और एआई फेक वीडियो लीक करने की धमकियों के बीच बिहार पुलिस ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। लेकिन यह डिजिटल टूल बिना फोटो अपलोड किए इंटरनेट से अश्लील सामग्री कैसे गायब कर देता है?
पटना | 8 मार्च 2026: आज के डिजिटल युग में जहां इंटरनेट ने हमारी जिंदगी आसान की है, वहीं साइबर अपराध (Cyber Crime) भी अपने चरम पर पहुंच गया है। आए दिन साइबर ठग और अपराधी लोगों की निजी (प्राइवेट) तस्वीरें या वीडियो लीक करने की धमकियां देकर ब्लैकमेलिंग और सेक्सटॉर्शन जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
इस गंभीर समस्या और लोगों के मानसिक तनाव को देखते हुए Bihar Police ने एक बेहद अहम और राहत देने वाली एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने नागरिकों को ‘StopNCII’ नामक एक शक्तिशाली डिजिटल टूल के बारे में जागरूक किया है।
इस टूल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप अपनी तस्वीरें या वीडियो इंटरनेट से हटवा सकते हैं, वह भी बिना उस तस्वीर को कहीं अपलोड किए। ‘खबर आंगन’ की साइबर सुरक्षा डेस्क आपको Bihar Police द्वारा जारी की गई इस महत्वपूर्ण गाइडलाइन और टूल के इस्तेमाल की पूरी प्रक्रिया विस्तार से बता रही है।
बिना सहमति फोटो अपलोड करना है क्रिमिनल ऑफेंस
Bihar Police ने अपनी आधिकारिक सूचना में स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति की प्राइवेट फोटोज, वीडियोज, एआई (AI) द्वारा एडिटेड, मॉर्फ्ड (Morphed) या फेक तस्वीरें बिना उसकी सहमति (Consent) के ऑनलाइन अपलोड करना एक गंभीर आपराधिक कृत्य (Criminal Offence) है।
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अक्सर पीड़ित बदनामी के डर से पुलिस या किसी से शिकायत नहीं करते हैं और ब्लैकमेलर्स का शिकार होते रहते हैं। इसी डर को खत्म करने के लिए StopNCII.org प्लेटफॉर्म को पेश किया गया है।
यह प्लेटफॉर्म पीड़ितों को सशक्त बनाता है। इस टूल की मदद से आप बिना कोई असली इमेज अपलोड किए, अपनी प्राइवेट इमेजेस के ऑनलाइन दुरुपयोग (Misuse) को पूरी तरह से रोक सकते हैं।
कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर हम टूल पर फोटो अपलोड नहीं करेंगे, तो वह इंटरनेट से हटेगी कैसे? इसके पीछे एक बेहद सुरक्षित और उन्नत तकनीक काम करती है। Bihar Police ने इसके काम करने के तरीके को कुछ इस तरह समझाया है:
डिवाइस पर ही सिलेक्शन: आपको अपनी ओरिजिनल इमेज (Original Image) या वीडियो केवल अपने फोन या डिवाइस पर ही सेलेक्ट करना होता है।
डिजिटल फिंगरप्रिंट (Hash): जब आप तस्वीर सेलेक्ट करते हैं, तो StopNCII सिस्टम उस कंटेंट का एक अनोखा ‘डिजिटल फिंगरप्रिंट’ या ‘हैश’ (Hash) कोड बनाता है।
प्लेटफॉर्म्स के साथ शेयरिंग: आपकी तस्वीर कहीं नहीं जाती, बल्कि यह ‘हैश’ कोड सुरक्षित रूप से विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स (जैसे सोशल मीडिया साइट्स) के साथ शेयर किया जाता है।
ऑटोमैटिक ब्लॉकिंग: इंटरनेट पर जहां भी वही इमेज अपलोड होती है या की जाती है, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स उस ‘हैश’ कोड को डिटेक्ट करके तुरंत उसे ब्लॉक या रिमूव (Remove) कर देते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में आपकी इमेज कभी भी आपके फोन या डिवाइस से बाहर नहीं जाती है, लेकिन उसका ऑनलाइन फैलना (Online Spread) पूरी तरह से रोक दिया जाता है।
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टूल का इस्तेमाल करने का सही और सुरक्षित तरीका
यदि आप या आपका कोई जानने वाला ऐसी किसी परिस्थिति का सामना कर रहा है, तो बिना घबराए इस टूल का इस्तेमाल किया जा सकता है। Bihar Police द्वारा साझा किए गए स्टेप्स इस प्रकार हैं:
सबसे पहले अपने वेब ब्राउजर में जाकर आधिकारिक वेबसाइट ‘stopncii.org’ पर जाएं और वहां अपना केस क्रिएट (Case Create) करें।
केस बनाते समय मांगी गई जानकारी भरें और इमेज/वीडियो सिर्फ अपने डिवाइस की गैलरी से सेलेक्ट करें।
पूरी प्रक्रिया के बाद सिस्टम आपको एक ‘केस नंबर’ (Case Number) और एक ‘पिन’ (PIN) देगा, जिसे आपको भविष्य के लिए सुरक्षित रखना होगा।
इन महत्वपूर्ण नियमों का रखें खास ध्यान
Bihar Police ने इस टूल के उपयोग को लेकर कुछ सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। यह जानना बेहद जरूरी है कि यह टूल 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र (18+ users) के यूजर्स के लिए ही उपलब्ध है।
इसके साथ ही, आप इस टूल पर केस सिर्फ अपनी खुद की इमेजेस या वीडियोज के लिए ही फाइल कर सकते हैं, किसी अन्य व्यक्ति के लिए नहीं।
आजकल डीपफेक (Deepfake) का खतरा काफी बढ़ गया है, इसलिए Bihar Police ने यह भी स्पष्ट किया है कि ‘AI-generated fake Images’ (एआई द्वारा बनाई गई फर्जी तस्वीरें) भी इस शक्तिशाली टूल के तहत कवर होती हैं और उन्हें भी ब्लॉक किया जा सकता है। Bihar Police ने यह भी सलाह दी है कि किसी भी प्रकार की साइबर शिकायत के लिए भारत सरकार के पोर्टल ‘www.cybercrime.gov.in’ पर संपर्क करें।
हमारा निष्कर्ष
Bihar Police द्वारा StopNCII टूल के बारे में दी गई यह जानकारी मौजूदा डिजिटल दौर में एक ‘संजीवनी’ की तरह है। अक्सर प्राइवेट पलों की तस्वीरें या एआई द्वारा बनाए गए फेक वीडियो लोगों की जिंदगी तबाह कर देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इंटरनेट पर एक बार कुछ चला गया तो उसे हटाना नामुमकिन है। यह टूल हैश तकनीक का इस्तेमाल कर प्राइवेसी की पूरी गारंटी देता है, क्योंकि डेटा कभी फोन से बाहर जाता ही नहीं।
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‘खबर आंगन’ की अपील है कि ब्लैकमेलर्स से डरने या घबराने के बजाय, इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और साइबर अपराधियों के मंसूबों को नाकाम करें। जरूरत पड़ने पर बेझिझक राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल का भी सहारा लें।
Disclaimer: यह खबर ‘Khabar Aangan’ की साइबर डेस्क द्वारा बिहार पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी की गई जनहित एडवाइजरी और सुरक्षा गाइडलाइंस के आधार पर संकलित की गई है। किसी भी प्रकार के साइबर अपराध की स्थिति में पाठकों को त्वरित कानूनी सहायता के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) या स्थानीय पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।
Ashutosh Jha एक डिजिटल पत्रकार और न्यूज़ लेखक हैं, जो भारत की राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, टेक्नोलॉजी और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। वे तथ्य आधारित रिपोर्टिंग और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचार लिखने के लिए जाने जाते हैं।डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहते हुए Ashutosh Jha ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर विश्लेषणात्मक लेख और समाचार प्रकाशित किए हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक निष्पक्ष, प्रमाणिक और जनहित से जुड़ी जानकारी पहुँचाना है।वर्तमान में वे Khabar Aangan न्यूज़ प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-दुनिया की ताज़ा खबरों, सरकारी नीतियों, सामाजिक बदलाव और टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर नियमित लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं।