मुजफ्फरपुर | 8 मार्च 2026: बिहार में भ्रष्टाचार और घूसखोरी के खिलाफ राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) नीति अब जमीन पर सख्ती से लागू होती दिख रही है। पुलिस विभाग ने खाकी वर्दी को दागदार करने वाले एक भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) की जांच में रिश्वतखोरी के संगीन आरोप सही साबित होने के बाद एक पुलिस अवर निरीक्षक (Sub-Inspector) को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
इस ऐतिहासिक और बड़ी विभागीय कार्रवाई के बाद पूरे Muzaffarpur और वैशाली जिले के पुलिस महकमे में भारी हड़कंप मचा हुआ है। ‘खबर आंगन’ की इन्वेस्टिगेशन डेस्क इस पूरे घूसकांड, इसके पीछे के काले कारनामों और 1.5 किलो सोने के रहस्यमयी गबन की विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट आपके लिए लेकर आई है।
बांदरा बाजार के पास रंगेहाथ पकड़ाया था भ्रष्ट दारोगा
इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल की शुरुआत Muzaffarpur जिले के सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र से हुई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र के ही रहने वाले पवन कुमार नामक व्यक्ति ने पुलिस के लगातार उत्पीड़न और घूसखोरी से तंग आकर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना का दरवाजा खटखटाया था।
पवन कुमार ने ब्यूरो में दर्ज अपनी गुप्त शिकायत में बताया था कि सिवाईपट्टी थाने में पदस्थापित तत्कालीन पुलिस अवर निरीक्षक सुमनजी झा किसी काम के एवज में उनसे लगातार रिश्वत की मांग कर रहे हैं और काम अटका रहे हैं।
शिकायत मिलते ही निगरानी विभाग ने आरोपों का सत्यापन किया और अपना जाल बिछा दिया। 4 सितंबर 2024 को ब्यूरो की विशेष धावादल टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दारोगा सुमनजी झा को बांदरा बाजार के पास शिकायतकर्ता से 11 हजार रुपये की नकद रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चला मुकदमा
रंगेहाथ गिरफ्तारी के तुरंत बाद ही निगरानी ब्यूरो ने सुमनजी झा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत नामजद प्राथमिकी दर्ज की थी। इस शर्मनाक घटना के बाद आरोपी दारोगा को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस मुख्यालय स्तर पर इस पूरे मामले की एक सघन विभागीय जांच (Departmental Enquiry) शुरू की गई। विभागीय जांच टीम ने शिकायतकर्ता पवन कुमार के बयान, निगरानी टीम की रेड रिपोर्ट और मौके से हुई बरामदगी के सभी इलेक्ट्रॉनिक एवं भौतिक सबूतों का बारीकी से विश्लेषण किया।
लगभग डेढ़ साल तक चली इस गहन जांच और सुनवाई प्रक्रिया के बाद सुमनजी झा पर लगे आरोप पूरी तरह से सिद्ध पाए गए। इसके परिणामस्वरूप, विभागीय प्राधिकार ने कोई भी नरमी न बरतते हुए 7 मार्च 2026 को एक कड़ा आदेश जारी किया और सुमनजी झा को पुलिस सेवा से स्थायी रूप से बर्खास्त (Dismiss) कर दिया।
सिर्फ 11 हजार नहीं, 1.5 किलो सोने के गबन का भी है आरोप
इस भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की कहानी सिर्फ 11 हजार रुपये की छोटी सी रिश्वत तक ही सीमित नहीं है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, बर्खास्तगी से ठीक पहले सुमनजी झा वर्तमान में वैशाली जिले में पदस्थापित थे, जहां उनके खिलाफ एक और बहुत बड़ा और संगीन मामला चल रहा है।
आरोप है कि वैशाली में एक अन्य आपराधिक मामले की जांच के दौरान पुलिस ने लगभग 1.5 किलोग्राम सोना और भारी मात्रा में नकद राशि बरामद की थी। लेकिन दारोगा सुमनजी झा ने जानबूझकर इस बेशकीमती बरामदगी को आधिकारिक ‘जब्ती सूची’ (Seizure List) में सही तरीके से दर्ज ही नहीं किया।
सोने और नकदी के इस सनसनीखेज गबन के मामले में भी उनके खिलाफ अलग से विभागीय और कानूनी कार्रवाई समानांतर रूप से चल रही है। अगर इस भारी गबन के मामले में भी उन पर आरोप सिद्ध होते हैं, तो आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के साथ-साथ उनकी मुश्किलें और भी अधिक बढ़ सकती हैं।
बिहार में निगरानी विभाग का ‘ऑपरेशन क्लीन’
पिछले कुछ वर्षों से बिहार में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो लगातार भ्रष्ट लोक सेवकों के खिलाफ ‘ऑपरेशन क्लीन’ चला रहा है। भ्रष्ट अधिकारियों को रंगेहाथ पकड़ने के लिए ब्यूरो ने अपना एक अलग और बेहद मजबूत इंटेलिजेंस नेटवर्क तैयार किया है।
सिर्फ पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि राजस्व, निबंधन और शिक्षा विभाग के कई बड़े और रसूखदार अधिकारी भी इस ब्यूरो के रडार पर आ चुके हैं। ब्यूरो की कार्यप्रणाली इतनी गुप्त और सटीक होती है कि भनक लगने से पहले ही भ्रष्टाचारी सीधे सलाखों के पीछे पहुंच जाते हैं।
पुलिस मुख्यालय ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी जिले या थाने में दागी और भ्रष्ट अधिकारियों को अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि अब सिर्फ निलंबन (Suspension) नहीं, बल्कि सीधे नौकरी से बर्खास्त करने जैसे कठोर और ऐतिहासिक फैसले लिए जा रहे हैं।
हमारा निष्कर्ष
दारोगा सुमनजी झा की पुलिस सेवा से यह बर्खास्तगी इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और पाप का घड़ा एक दिन जरूर फूटता है। ‘खबर आंगन’ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो और बिहार पुलिस मुख्यालय की इस ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का पुरजोर समर्थन करता है।
खाकी वर्दी का काम आम जनता की रक्षा करना है, न कि उन्हें डरा-धमका कर अपनी काली जेबें भरना। उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक और कड़ी कार्रवाई के बाद थानों में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और आम नागरिकों को न्याय पाने के लिए किसी भी टेबल के नीचे से रिश्वत नहीं देनी पड़ेगी।
Disclaimer: यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ‘खबर आंगन’ की इन्वेस्टिगेशन डेस्क द्वारा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Bureau) की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और पुलिस विभाग के विभागीय आदेशों के आधार पर तैयार की गई है। हम एक भ्रष्टाचार मुक्त समाज और निष्पक्ष पत्रकारिता के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं।
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