इस मनहूस खबर के सामने आते ही उदाकिशुनगंज थाने से लेकर पूरे जिला पुलिस मुख्यालय तक में भारी शोक की लहर दौड़ गई है। ड्यूटी पर तैनात एक कर्मठ अधिकारी के यूं अचानक चले जाने से उनके सहकर्मी गहरे सदमे और अविश्वास में हैं।
खाकी वर्दी पहनकर दिन-रात आम जनता की सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाले कौलेश्वर सिंह अपनी कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन के लिए जाने जाते थे। उनके इस आकस्मिक निधन से बिहार पुलिस ने अपना एक बेहद अनुभवी और जांबाज अधिकारी खो दिया है।
इस दुखद घटना की सूचना मिलते ही राज्य के पुलिस मुख्यालय ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। बिहार पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और जनसंपर्क विभाग की ओर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई है।
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक शोक संदेश में कहा गया है कि इस दुःख और असीम पीड़ा की घड़ी में पूरा पुलिस परिवार स्वर्गीय कौलेश्वर सिंह जी के परिजनों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। महकमे ने उनके योगदान को अतुलनीय बताया है।
एक पुलिस अधिकारी का यूं बीच सफर में साथ छोड़ जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे पुलिस बल के लिए एक अपूरणीय क्षति होती है। वरिष्ठ अधिकारियों ने दिवंगत सब-इंस्पेक्टर के परिजनों को हर संभव विभागीय सहायता और ढांढस बंधाने का आश्वासन दिया है।
जहानाबाद के रहने वाले थे जांबाज अधिकारी
Madhepura जिले की कानून व्यवस्था को संभालने वाले पुलिस अवर निरीक्षक (पु०अ०नि०) कौलेश्वर सिंह मूल रूप से बिहार के ही जहानाबाद जिले के निवासी थे। वह अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर मधेपुरा में रहकर अपनी सरकारी और सामाजिक ड्यूटी पूरी कर रहे थे।
जैसे ही उनके असामयिक निधन की खबर उनके पैतृक जिले जहानाबाद स्थित उनके गांव और परिजनों तक पहुंची, वहां चीख-पुकार मच गई। उनके घर और पूरे इलाके में मातम का सन्नाटा पसर गया है।
त्योहारों और आम दिनों में भी अपने परिवार से दूर रहकर देश और समाज की सेवा करने वाले इस पुलिस अधिकारी के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग उनके मिलनसार स्वभाव और पुलिस की वर्दी में उनके रुतबे को याद कर भावुक हो रहे हैं।
उदाकिशुनगंज थाने में पसरा भारी सन्नाटा
उदाकिशुनगंज अनुमंडल और थाना क्षेत्र Madhepura जिले के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त इलाकों में से एक माना जाता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर कार्य करना एक बड़ी और तनावपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
थाने में उनके साथ काम करने वाले जूनियर और सीनियर पुलिसकर्मियों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। कल तक जो अधिकारी अपने साथियों के साथ गश्त कर रहा था और केस की फाइलें निपटा रहा था, उसका अचानक शांत हो जाना सबको रुला रहा है।
सहकर्मियों ने बताया कि स्वर्गीय कौलेश्वर सिंह अपने काम के प्रति बेहद ईमानदार थे और थाने में आने वाले आम फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते थे। उनकी खाली कुर्सी देखकर आज पूरे थाने का माहौल बेहद गमगीन और भारी हो गया है।
पुलिसकर्मियों का कठिन जीवन और तनावपूर्ण ड्यूटी
यह घटना एक बार फिर पुलिसकर्मियों के बेहद कठिन, अनियमित और तनावपूर्ण जीवन की ओर ध्यान खींचती है। पुलिस विभाग में ड्यूटी का कोई तय समय नहीं होता, और आपातकालीन स्थितियों में उन्हें लगातार कई-कई घंटों तक काम करना पड़ता है।
नींद की कमी, परिवार से दूरी, और अपराधियों से निपटने का मानसिक दबाव अक्सर पुलिस अधिकारियों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ता है। कई बार काम के इस भारी बोझ और तनाव के कारण अधिकारी अपनी खुद की सेहत और शारीरिक समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं।
वर्दी की जिम्मेदारी निभाते हुए कई जांबाज अधिकारी असामयिक ही काल के गाल में समा जाते हैं। यह समाज के लिए सोचने का विषय है कि जो पुलिस हमारी सुरक्षा के लिए दिन-रात एक करती है, उनके स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए भी एक बेहतर प्रणाली विकसित की जानी चाहिए।
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अंतिम विदाई और राजकीय सम्मान की तैयारी
दिवंगत सब-इंस्पेक्टर कौलेश्वर सिंह के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन और सम्मान के लिए पुलिस लाइन लाया जाएगा। वहां जिले के आला पुलिस अधिकारी और उनके सहकर्मी उन्हें अपनी भावभीनी और अंतिम विदाई देंगे।
पुलिस विभाग के प्रोटोकॉल के तहत, ड्यूटी के दौरान या सेवाकाल में जान गंवाने वाले अधिकारियों को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी जाती है। इस दौरान पुलिस बल द्वारा ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (Guard of Honor) देकर उनके त्याग और सेवा को सलामी दी जाएगी।
इसके बाद पूरे विधि-विधान और कागजी कार्रवाई के बाद उनका पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा, ताकि उनके पैतृक निवास जहानाबाद में उनका अंतिम संस्कार किया जा सके। पूरा महकमा इस दुखद घड़ी में उनके परिवार को सांत्वना दे रहा है।