मुजफ्फरपुर, 24 सितंबर 2026: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड में गुरुवार को उस वक्त अचानक हड़कंप मच गया, जब उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्री निशांत सिहारा वहां औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। उन्होंने बिना किसी पूर्व सूचना के ब्लॉक कार्यालय का दौरा किया और चल रही विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत को बारीकी से परखा। इस दौरान उन्होंने कार्यालय में मौजूद सभी प्रखंड स्तरीय कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की, जिसमें कार्यों की भारी लापरवाही उजागर हुई।
डीडीसी निशांत सिहारा ने समीक्षा बैठक के दौरान मजदूरों से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि ग्रामीण मजदूरों के लिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार (मानव दिवस) के अवसर पैदा किए जाएं। इसके साथ ही प्रखंड की हर पंचायत में काम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि मजदूरों का ई-केवाईसी (e-KYC) जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि उनके भुगतान में देरी न हो।
बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों की वर्तमान स्थिति, ग्रामीण बाजारों (हाट) के निर्माण और कायाकल्प योजना के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति की भी बहुत बारीकी से जांच की गई। डीडीसी ने क्षेत्र में हुए पुराने और नए वृक्षारोपण अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि पेड़ों की देखभाल करने वाले मजदूरों (वनपोषकों) को उनके काम का पैसा बिल्कुल समय पर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सभी महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं के काम में तुरंत तेजी लाई जाए।
कार्यालय में दस्तावेजों की समीक्षा खत्म करने के बाद डीडीसी निशांत सिहारा सीधे फील्ड में निकल गए। उन्होंने मीनापुर प्रखंड की अलग-अलग पंचायतों में जाकर वहां बनाए जा रहे खेल मैदानों और वृक्षारोपण के कार्यों का जमीनी स्तर पर मुआयना किया। इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने काम की गुणवत्ता को लेकर उपस्थित अधिकारियों को कई जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने साफ तौर पर हिदायत दी कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही या घटिया सामग्री का इस्तेमाल कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कार्यालय के दस्तावेजों की जांच के दौरान अनियमितता भी सामने आई। डीडीसी ने खुद पाया कि कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) और लेखापाल द्वारा योजना पंजी, कैश बुक और फंड ट्रांसफर ऑर्डर (FTO) रजिस्टर को सरकारी नियमों के हिसाब से बिल्कुल मेंटेन नहीं किया जा रहा था। सरकारी पैसों के हिसाब-किताब में इसे घोर लापरवाही मानते हुए डीडीसी ने दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण (कारण बताओ नोटिस) मांगने का कड़ा निर्देश दिया है।
डीडीसी निशांत सिहारा ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में सभी सरकारी रजिस्टरों और कैश बुक को एकदम समय पर और सही तरीके से अपडेट रखा जाए। इसमें किसी भी तरह की कोताही सरकारी पैसे के दुरुपयोग के रूप में देखी जाएगी। डीडीसी का गुस्सा मीनापुर प्रखंड में तैनात पंचायत तकनीकी सहायकों (पीटीए) पर भी जमकर फूटा। जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि ये तकनीकी सहायक समय पर मापी पुस्तिका (मेजरमेंट बुक) को अपडेट करने में पूरी तरह फेल रहे हैं।
तकनीकी सहायकों की काम के प्रति उदासी और विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने में दिलचस्पी न लेने पर डीडीसी ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सभी पंचायत तकनीकी सहायकों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि वे अपने काम के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से समझें और अपनी कार्यशैली में तुरंत सुधार लाएं। योजनाओं को लटकाने या कागजों में काम दिखाने की प्रवृत्ति को अब किसी भी कीमत पर जिला प्रशासन द्वारा सहन नहीं किया जाएगा।
बैठक के अंत में डीडीसी निशांत सिहारा ने कड़े शब्दों में निर्देश देते हुए कहा कि सभी अधिकारी प्रखंड और पंचायत के जनप्रतिनिधियों के साथ आपसी तालमेल बनाकर काम करें। योजनाओं को लागू करने में हर हाल में प्रगति दिखनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अगर भविष्य में दोबारा काम में इस तरह की लापरवाही पाई गई, तो बिना किसी रियायत के सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण विकास सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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